क्षेत्रीय
23-Apr-2026
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-चपरासी से लेकर प्राचार्य और सहायक संचालक लिप्त, 19 पर विभागीय जांच और एफआईआर की तैयारी इन्दौर (ईएमएस) वर्ष 2017 से 2022 के बीच स्कूली शिक्षा विभाग में हुए लगभग ढाई करोड़ के गबन मामले की जांच कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन ने जो कमेटी बनाकर करवाई थी उसमें कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में यह पता चला कि विभाग के चपरासी, अतिथि शिक्षक, सहायक संचालक और प्राचार्य तक इसमें लिप्त हैं और उन्होंने अलग-अलग निजी खातों में यह सरकारी राशि जमा कराई थी। जांच कमेटी में संभागीय संयुक्त संचालक कोष और लेखा दिव्या शर्मा के साथ मनीष दुबे, प्रतीक गौड़, गुंजन तेजावत, चेतना पटेल, सिंपल पटेल, सजल सक्सेना, सुनंदा बघेल, अमान नकवी और निधि कटियार आदि शामिल रहे। जांच के बाद इसमें मुख्य रूप से सिद्धार्थ जोशी नामक चपरासी की भूमिका सामने आई है। जिसने अपनी पत्नी-पुत्र और अन्य परिजनों के 8 खातों में लगभग पौने 2 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा करा दी। अब इस 1 करोड़ 75 लाख 62,277 रुपए की राशि की वसूली जोशी से होगी। जांच में सामने आया कि एक अतिथि शिक्षक मोहन डांगी के खाते में 8 लाख 41 हजार 390 रुपए जमा हुए, तो एक अन्य चपरासी पवन खामोद के खाते में 32800 रुपए, वहीं सहायक ग्रेड-2 छोटेलाल गौड़, जिसकी मृत्यु 14.10.2023 को हो चुकी है, के खाते में 1 लाख 16 हजार 750 रुपए जमा हुए। इसी तरह एक अन्य अतिथि शिक्षक केदार नारायण दीक्षित के खाते में 16 लाख 66 हजार 259 रुपए जमा हुए। अब इन 5 मुख्य आरोपियों के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है। वहीं इस ढाई करोड़ से अधिक के गबन मामले में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच कराई जा रही है, क्योंकि उनके लॉग इन पासवर्ड का उपयोग कर ही इस राशि को ट्रांसफर किया गया, जिसमें प्राचार्य ओपी वर्मा, अनिता चौहान, महेश खोटे, डॉ. शांता स्वामी के अलावा राजेन्द्रसिंह जाधोन, मेघना चाल्र्स, दिनेश पंवार शामिल हैं। जांच में यह खुलासा हुआ कि इस पूरे मामले में लगभग 19 लोग शामिल रहे और राशि को मंजूर करने के मामले में भी आधा दर्जन अधिकारी शामिल रहे, जिनमें सहायक संचालक भार्गव के अलावा प्राचार्य विजया शर्मा व अन्य के नाम मिले हैं। कलेक्टर वर्मा के अनुसार इस गबन राशि की सख्ती से वसूली संबंधित आरोपियों से की जाएगी वहीं दोषियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है। आनंद पुरोहित/ 23 अप्रैल 2026