ज़रा हटके
24-Apr-2026
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-खाड़ी के देशों से इसी रूट से होती है बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्‍लाई तेहरान (ईएमएस)। होर्मुज स्‍ट्रेट में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाले होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बाधित होने से एशिया से लेकर यूरोप तक के देशों में तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है। ईरान इस संकरे से समुद्री कॉरिडोर को बार्गेनिंग चिप की तरह इस्‍तेमाल कर रहा है, जिससे दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस की स्थिति है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने होर्मुज को लेकर ऐसा खुलासा किया है, जिससे दुनियाभर के देशों की धड़कनें बढ़नी तय हैं। दरअसल, होर्मुज स्‍ट्रेट में ईरान ने सी-माइंस बिछा दिया है। अमेरिका का कहना है कि ईरान जंग के खत्म होने के बाद इन माइंस को पूरी तरह से क्लियर कर होर्मुज को सुरक्षित बनाने में कम से कम 6 महीने का वक्‍त लगेगा। साथ में यह भी कहा कि 6 महीनों के लिए इस जलडमरूमध्‍य को बंद करना असंभव है। बता दें होर्मुज भारत के एनर्जी सप्‍लाई चेन के लिए काफी अहम है। खाड़ी के देशों से इसी रूट से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्‍लाई होती है। ऐसे में अब यह एक नया खतरा पैदा हो गया है। अमेरिका के रक्षा मुख्यालय पेंटागन में हाल ही में हुई एक गोपनीय ब्रीफिंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि ईरान के साथ जारी युद्ध के बाद होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित और साफ करने में छह महीने तक का समय लग सकता है। ब्रीफिंग में बताया गया कि ईरान ने इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में बड़ी संख्या में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाई हैं। अनुमान है कि इनकी संख्या 20 या उससे अधिक हो सकती है। इनमें से कुछ माइंस को जीपीएस तकनीक के जरिए दूर से नियंत्रित तरीके से छोड़ा गया, जिससे उन्हें ढूंढना और निष्क्रिय करना और कठिन है। वहीं, कुछ माइंस को ईरानी नौकाओं के जरिए सीधे समुद्र में बिछाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस स्थिति में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जिसका असर अमेरिका के आगामी मध्यावधि चुनावों पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह की सफाई और सुरक्षा अभियान तब तक शुरू नहीं किया जा सकता जब तक अमेरिका और इजराइल का ईरान के साथ चल रहा युद्ध समाप्त नहीं हो जाता यानी संघर्ष की अवधि जितनी लंबी होगी, आर्थिक असर भी उतना ही गहरा होगा। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इस युद्ध को लेकर स्पष्ट किया है कि इसके खत्म होने की कोई तय समयसीमा नहीं है। यदि ईरान इस रणनीतिक मार्ग को लंबे समय तक बाधित रखने में सफल रहता है, तो यह न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के लिए आर्थिक और रणनीतिक चुनौती बन सकता है। सिराज/ईएमएस 24 अप्रैल 2026