न्यूयॉर्क (ईएमएस)। अमेरिका के न्यूयॉर्क प्रांत के इथाका स्थित ईस्ट लॉन कब्रिस्तान की मिट्टी के नीचे लगभग 55 लाख रेगुलर माइनर बीज (एंड्रेना रेगुलैरिस) का विशालकाय संसार छिपा है। ये मधुमक्खियां कोई साधारण मधुमक्खियां नहीं हैं, बल्कि ये जमीन के अंदर अपना घर बनाती हैं। हर साल वसंत ऋतु में यहां जमीन से लाखों की संख्या में मधुमक्खियां बाहर निकलती हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में खुलासा किया है कि यह दुनिया में मधुमक्खियों के सबसे बड़े ज्ञात जमावड़ों में से एक है। आमतौर पर हम मधुमक्खियों को पेड़ों या ऊंची इमारतों पर छत्ता बनाकर रहते देखते हैं, लेकिन यह प्रजाति एक अनूठा उदाहरण पेश करती है। इस विशाल बसेरे की खोज इत्तेफाक से हुई थी, जब कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की लैब में काम करने वाली रेचल फोर्डाइस ने पार्किंग की तलाश में इस कब्रिस्तान के पास बड़ी संख्या में मधुमक्खियों को जमीन से निकलते देखा। उन्होंने कुछ मधुमक्खियों को इकट्ठा कर अपने सहयोगियों को दिखाया, जिसके बाद 2023 में वैज्ञानिकों की एक टीम ने यहां फील्ड वर्क शुरू किया। जांच में पता चला कि कब्रिस्तान की रेतीली मिट्टी के हर एक स्क्वायर मीटर में औसतन 853 मधुमक्खियां अपने घोंसले बनाकर रह रही हैं। जब पूरे एरिया का हिसाब लगाया गया, तो यह संख्या 55.6 लाख के करीब पहुंची। माइनर बीज काफी शांत स्वभाव की होती हैं और सॉलिटरी बीज कहलाती हैं, जिसका मतलब है कि हर मादा मधुमक्खी जमीन के नीचे अपनी अलग सुरंग या बिल खोदती है। ये अप्रैल के महीने में जमीन से बाहर निकलती हैं ताकि फूलों का रस ले सकें और प्रजनन कर सकें। मादा मधुमक्खियां जमीन के अंदर अंडे देती हैं और वहां पराग जमा करती हैं ताकि उनके लार्वा सर्दियों में जिंदा रह सकें। ये मधुमक्खियां सर्दियों का पूरा वक्त जमीन के नीचे ही बिताती हैं और वसंत आते ही दोबारा बाहर निकल आती हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह खोज इसलिए भी खास है क्योंकि यह प्रजाति वयस्क के रूप में जमीन के नीचे सर्दियां बिताती है, जो बहुत ही दुर्लभ बात है। इनका मुख्य मकसद सेब और ब्लूबेरी के फूलों का परागण करना होता है, जो खेती के लिए बहुत फायदेमंद है और न्यूयॉर्क की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है। रिसर्च बताती है कि न्यूयॉर्क के मशहूर सेबों के बागों में परागण का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं माइनर बीज की वजह से पूरा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कब्रिस्तान इन जीवों के लिए एक सुरक्षित स्वर्ग की तरह होते हैं। यहां शांति होती है, इंसानों की दखलअंदाजी बहुत कम होती है, और सबसे बड़ी बात यह है कि कब्रिस्तानों में कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होता और जमीन को बार-बार खोदा नहीं जाता, जिससे मधुमक्खियों को अपने घर बनाने के लिए स्थिर मिट्टी मिलती है। दुनिया की करीब 75 प्रतिशत मधुमक्खी प्रजातियां जमीन के नीचे ही रहती हैं, लेकिन उनके बारे में हमें बहुत कम जानकारी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें ऐसे प्राकृतिक बसेरों को बचाने की जरूरत है, क्योंकि इन करोड़ों जरूरी पोलिनेटर्स का संरक्षण पर्यावरण के संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। सुदामा/ईएमएस 24 अप्रैल 2026