ज़रा हटके
24-Apr-2026
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मॉस्‍को (ईएमएस)। हाल के दिनों में कई प्रभावशाली इन्फ्लुएंसर्स और ब्लॉगर्स ने रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ सोशल मीडिया पर खुलकर सरकार की नीतियों की आलोचना की है। इस बढ़ते विरोध की अगुवाई कुछ प्रमुख रूसी ब्यूटी इन्फ्लुएंसर्स और ब्लॉगर्स कर रही हैं। मशहूर रूसी ब्यूटी इन्फ्लुएंसर विक्टोरिया बोन्या ने इंस्टाग्राम पर एक साहसिक पोस्ट में सीधे पुतिन को संबोधित करते हुए लिखा, व्लादिमीर व्लादिमीरोविच, लोग आपसे डरते हैं। ब्लॉगर आपसे डरते हैं, कलाकार आपसे डरते हैं, गवर्नर आपसे डरते हैं…और आप हमारे देश के राष्ट्रपति हैं। बोन्या ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें दागेस्तान में बाढ़ के दौरान धीमी प्रतिक्रिया, साइबेरिया में पशु वध के कथित कुप्रबंधन और सोशल मीडिया पर लगातार बढ़ती पाबंदियां शामिल हैं। बोन्या ने चिंता व्यक्त की कि इन प्रतिबंधों के कारण लोग अपने परिजनों से भी ठीक से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जिससे ऐसा लगने लगा है कि देश अब आजाद नहीं रहा। उल्लेखनीय है कि बोन्या अब मोनाको में रहती हैं और अपनी कॉस्मेटिक्स लाइन चलाती हैं। उनके इस इंस्टाग्राम वीडियो को 2.83 करोड़ से अधिक व्यूज़ मिले और लगभग 15 लाख लाइक्स तथा 80 लाख कमेंट्स आए, जिनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी बहादुरी की प्रशंसा की। इस कड़ी में एक अन्य चर्चित इन्फ्लुएंसर आइजा ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध रूस की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दे सकते हैं। उन्होंने उच्च कर, बढ़ती असमानता और नेताओं की संपत्ति पर भी सवाल उठाए, हालांकि बाद में उन्होंने अपना यह वीडियो हटा लिया। इसी तरह, रूस की ब्लॉगर लिजा मोका ने एक भावुक वीडियो में साझा किया कि मौजूदा हालात में जीवन जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि दूरदराज के इलाके में रहने के कारण उनके बच्चों की पढ़ाई और उनका काम पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर है, लेकिन सरकारी प्रतिबंधों ने यह भी मुश्किल बना दिया है। उनका यह वीडियो भी लाखों लोगों तक पहुंचा। एक 19 वर्षीय युवक आर्ट्योम ने भी एक वीडियो जारी कर कहा कि सोशल नेटवर्क्स पर प्रतिबंध और विज्ञापनों में अंग्रेजी शब्दों पर रोक जैसे फैसले लोगों की स्वतंत्रता को सीमित कर रहे हैं। उसने सवाल उठाया कि आखिर आजादी कहां है? यह वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ। मीडिया में भी सरकार की नीतियों को लेकर आलोचना देखने को मिल रही है। रूसी अखबार नेजाविसिमाया गजेटा में प्रकाशित एक लेख में इंटरनेट शटडाउन की तुलना सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन के दौर में विज्ञान पर लगाए गए प्रतिबंधों से की गई। राजनीतिक विश्लेषक तातियाना स्तानोवाया के अनुसार, हाल के इंटरनेट प्रतिबंध और टेलीग्राम पर कार्रवाई एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकते हैं। दरअसल, यूक्रेन के साथ जारी लंबे संघर्ष और देश के भीतर बढ़ती आर्थिक मुश्किलों के बीच सरकार द्वारा लागू की गई सख्त नीतियों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सुदामा/ईएमएस 24 अप्रैल 2026