अंतर्राष्ट्रीय
24-Apr-2026


तेहरान,(ईएमएस)। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव अमेरिका और ईरान के बीच गंभीर टकराव का संकेत दे रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बनता जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और एलएनजी की आपूर्ति गुजरती है। इसतरह यहां किसी भी प्रकार का संघर्ष पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह तनाव 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद शुरू हुआ। इसके जवाब में ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा किया और आईआरजीसी ने घोषणा की कि यहां से गुजरने वाले जहाजों को उसकी अनुमति लेनी होगी। लेकिन स्थिति तब और बिगड़ी जब 13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के जहाजों को रोकना, कब्जे में लेना और उनका मार्ग बदलना शुरू कर दिया। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका ने ईरानी पोत “टूस्का” को जब्त किया, जबकि ईरान ने इसे समुद्री डकैती बताया। तनाव चरम पर तब पहुंचा जब 22 अप्रैल को ईरान ने दो विदेशी कंटेनर जहाज—“एमएससी फ्रांसेस्का” और “एपामिनोंडास”—को अपने कब्जे में ले लिया और तीसरे जहाज “यूफोरिया” पर फायरिंग की। ईरान का कहना है कि ये जहाज बिना अनुमति उसके जलक्षेत्र से गुजर रहे थे। ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरेफ ने स्पष्ट किया कि होर्मुज की सुरक्षा मुफ्त में नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि यदि ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध जारी रहते हैं, तो अन्य देशों को भी जोखिम उठाना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सीधा युद्ध नहीं बल्कि “जैसे को तैसा” रणनीति है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर दबाव बना रहे हैं। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस स्ट्रेट से शांति काल में दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति गुजरती है। मौजूदा हालात में स्थिति यह है कि प्रवेश और निकास दोनों बिंदुओं पर अलग-अलग पक्षों का नियंत्रण है- ईरान बाहर निकलने वाले जहाजों पर और अमेरिका प्रवेश करने वाले जहाजों पर नजर रख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह सीधे टकराव के बजाय जैसे को तैसा रणनीति का हिस्सा है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विशेषज्ञ अली वाएज के मुताबिक, यह परस्पर दबाव की खतरनाक स्थिति है, जहां हर घटना बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है। ईरान ने साफ किया है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक होर्मुज को पूरी तरह खोलना संभव नहीं है। वहीं, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस बढ़ते तनाव से वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा असर पड़ सकता है। आशीष दुबे / 25 अप्रैल 2026