करांची,(ईएमएस)। पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती इलाके खैबर में इस हफ्ते सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए बड़े अभियान के दौरान भीषण मुठभेड़ हुई, इसमें सेना के अनुसार 22 संदिग्ध आतंकवादी मारे गए। यह कार्रवाई अफ़गानिस्तान की सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्र में की गई, जहां लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियाँ बनी हुई हैं। सेना की मीडिया विंग की ओर से बताया गया कि सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक संयुक्त रणनीतिक अभियान शुरू किया था। अभियान का उद्देश्य सीमा पार से सक्रिय माने जाने वाले सशस्त्र समूहों की गतिविधियों पर रोक लगाना था। जैसे ही सुरक्षा बल इलाके में आगे बढ़े, उन्हें सशस्त्र विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी शुरू हो गई। इस संघर्ष में 22 कथित आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया है। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियां एक बड़ी सफलता के रूप में देख रही हैं, लेकिन इस घटना ने स्थानीय स्तर पर एक गंभीर मानवीय त्रासदी भी पैदा कर दी। मुठभेड़ के दौरान गोलीबारी की चपेट में आकर एक 10 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। घटना ने क्षेत्र में रहने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इसतरह के अभियानों में अक्सर आम लोग भी प्रभावित हो जाते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घटना पर प्रतिक्रिया देकर दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने कार्यालय के माध्यम से जारी बयान में बच्चे की मौत पर शोक जताया और एक दर्दनाक घटना बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी के कारण मासूम बच्चे की जान जाना अत्यंत दुखद है, और सरकार इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। खैबर क्षेत्र, जो अफ़गानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है, वर्षों से सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता रहा है। इस इलाके की कठिन भौगोलिक संरचना और सीमापार गतिविधियों के कारण यहां अक्सर सुरक्षा बलों को अभियानों का सामना करना पड़ता है। सरकार लगातार इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए सैन्य और प्रशासनिक प्रयास करती रही है। हालांकि इन अभियानों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन स्थानीय नागरिकों के लिए यह स्थिति कई बार जोखिम भरी साबित होती है। हालिया घटना ने एक बार फिर इस बात को उजागर किया है कि सुरक्षा अभियानों और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है। आशीष दुबे / 24 अप्रैल 2026