वॉशिंगटन (ईएमएस)। मंगल ग्रह पर नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने प्राचीन जैविक अणुओं के अवशेष खोजे हैं। यह खोज सदियों से मानव सभ्यता को मथ रहे सवाल, क्या हम इस विशाल ब्रह्मांड में बिल्कुल अकेले हैं? को नया आयाम देती है। इन अवशेषों को जीवन के निर्माण खंड यानी बिल्डिंग ब्लॉक्स कहा जाता है। ताजा अध्ययन के अनुसार, अरबों साल पहले लाल ग्रह पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियाँ मौजूद रही होंगी। क्यूरियोसिटी ने गेल क्रेटर के ग्लेन टॉरिडन इलाके में उन मिट्टी के खनिजों का गहराई से विश्लेषण किया, जहाँ कभी पानी होने के सबसे मजबूत सबूत मिले थे। इस रिसर्च में पहली बार एक ऐसे नाइट्रोजन युक्त अणु की पहचान हुई है, जिसकी जटिल संरचना काफी हद तक प्रोटो-डीएनए की याद दिलाती है। मंगल ग्रह पर मिला यह ऑर्गेनिक खजाना हमें यह समझने में मदद करेगा कि क्या वास्तव में कभी वहाँ सूक्ष्मजीव सांस लेते थे। हालांकि रिसर्चर्स अभी भी इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि वे इसे सीधे तौर पर एलियन का मिलना न कहें, लेकिन रसायनों का यह मेल-जोल कुछ बड़ा इशारा कर रहा है। गेल क्रेटर वह ऐतिहासिक इलाका है, जहाँ क्यूरियोसिटी रोवर ने साल 2012 में कदम रखा था। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों साल पहले यहाँ पानी की विशाल झीलें और नदियाँ हुआ करती थीं। रिसर्च टीम ने खास तौर पर ग्लेन टॉरिडन क्षेत्र पर अपना ध्यान केंद्रित किया, जहाँ की मिट्टी में मिलने वाले विशेष मिनरल्स ने करोड़ों सालों से इन रासायनिक संकेतों को सुरक्षित रखा है। जांच के दौरान 20 से ज्यादा महत्वपूर्ण रसायनों की पहचान की गई है, जिनमें बेंजोथियोफीन जैसा सल्फर युक्त यौगिक भी मिला है, जो अक्सर अंतरिक्ष से गिरने वाले उल्कापिंडों में पाया जाता है। यह सवाल सबसे अहम है कि क्या ये रसायन किसी जीवित सूक्ष्मजीव के सड़े-गले अवशेष हैं? यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की प्रोफेसर और इस स्टडी की सह-लेखिका एमी विलियम्स के अनुसार, यह खोज जीवन की उपस्थिति का कोई अंतिम या सीधा प्रमाण नहीं है। उनके मुताबिक, ये अणु तीन अलग-अलग तरीकों से वहाँ पैदा हो सकते हैं: पहला, प्राचीन काल में मंगल पर रहने वाले छोटे जीवों से बने हों; दूसरा, अंतरिक्ष से गिरने वाले उल्कापिंडों या धूमकेतुओं के जरिए वहाँ पहुँचे हों; या तीसरा, मंगल की अपनी भूगर्भीय प्रक्रियाओं, जैसे ज्वालामुखी या रसायनों के आपस में मिलने से बने हों। हालांकि, सबसे बड़ी सफलता इस बात की है कि मंगल की सतह के ठीक नीचे ये जटिल जैविक पदार्थ अरबों साल तक सुरक्षित रह सकते हैं। यह जानकारी भविष्य के मानव मिशनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब वैज्ञानिकों को पता है कि उन्हें मंगल पर खुदाई कहाँ करनी है और किस तरह के मिट्टी के पैच में जीवन के असली सबूत छिपे हो सकते हैं। इस रिसर्च की असली ताकत एक नया और अनोखा केमिकल एक्सपेरिमेंट था। पहली बार किसी दूसरे ग्रह की मिट्टी पर टेट्रामेथिलअमोनियम हाइड्रॉक्साइड (टीएमएएच) नामक केमिकल का इस्तेमाल किया गया। इस रसायन की खासियत यह है कि यह जटिल जैविक अणुओं को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ देता है, जिससे रोवर की मशीनरी उन्हें आसानी से पढ़ पाती है। मंगल पर रेडिएशन बहुत ज्यादा है, जो जैविक पदार्थों को नष्ट कर देता है। इसके बावजूद, टीएमएएच तकनीक ने यह साबित कर दिया कि मंगल की ऊपरी सतह के नीचे ऑर्गेनिक कार्बन का बड़ा भंडार अभी भी सुरक्षित बचा हुआ है। यह डेटा साफ तौर पर दिखाता है कि मंगल की सतह के नीचे की दुनिया अभी भी कई ऐसे रहस्य दबाए हुए है, जो ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ को बदल सकते हैं। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने एक बेहद चौंकाने वाली बात कही। उन्होंने बताया कि अरबों साल पहले जिस तरह का मटेरियल अंतरिक्ष से धरती पर बरस रहा था, ठीक वैसा ही मंगल पर भी गिर रहा था। एमी विलियम्स का कहना है कि शायद इन्हीं पदार्थों ने हमारी धरती पर जीवन की पहली चिंगारी जलाई थी। क्यूरियोसिटी को मिले नाइट्रोजन और सल्फर वाले अणु बिल्कुल वैसे ही रॉ मटेरियल हैं, जिन्होंने पृथ्वी पर जीवन को पनपने में मदद की। लगभग 3.5 अरब साल पुराने बताए जा रहे ये नमूने इतनी लंबी अवधि और मंगल के बेहद कठिन वातावरण (जहरीली हवा और खतरनाक किरणें) के बाद भी इन अणुओं का बचे रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह खोज इस संभावना को और मजबूत करती है कि मंगल ग्रह कभी पूरी तरह से रहने योग्य (हेबिटेबल) रहा होगा। क्यूरियोसिटी रोवर की यह कामयाबी केवल एक छोटे कदम की तरह है, लेकिन इसकी गूँज बहुत दूर तक जाएगी। नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के आने वाले तमाम मिशन इस डेटा का इस्तेमाल करेंगे। ईएसए का रोजालिंड फ्रैंकलिन रोवर, जो जल्द ही मंगल के मैदानों में उतरेगा, वह भी इसी तरह की तकनीक का उपयोग करेगा। इसके अलावा, शनि के चंद्रमा टाइटन पर जाने वाला ड्रैगनफ्लाई मिशन भी इस रिसर्च से सीख लेगा। अब वैज्ञानिकों के पास यह कहने के लिए ठोस आधार है कि मंगल पर जटिल कार्बनिक पदार्थ प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। सुदामा/ईएमएस 25 अप्रैल 2026