मनोरंजन
25-Apr-2026
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मुंबई (ईएमएस)। हाल ही में अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक पॉडकास्ट का वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने साउथ सिनेमा और बॉलीवुड में शूटिंग के तरीकों में मौजूद मूलभूत फर्क पर खुलकर बात की है। रकुल प्रीत सिंह ने बताया कि मुंबई यानी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कॉल शीट का समय आमतौर पर सुबह 6 बजे या 7 बजे से शुरू होकर शाम 6 बजे तक होता है। उन्होंने इस अंतर को समझाते हुए कहा कि दोनों उद्योगों में काम करने का उनका अनुभव बहुत अलग-अलग रहा है, जो केवल भाषा और संस्कृति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि काम करने के समय और नियमों में भी स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि पूरी दुनिया में फिल्म बनाने की प्रक्रिया लगभग समान है, लेकिन साउथ सिनेमा और हिंदी सिनेमा के तकनीकी कामों में फर्क है। यह बताता है कि भले ही फिल्ममेकिंग के मूल सिद्धांत एक जैसे हों, लेकिन क्षेत्रीय परंपराएं और संघ के नियम इसे काफी हद तक प्रभावित करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से तेलुगु फिल्मों की शूटिंग के समय पर जोर दिया। रकुल ने कहा, तेलुगु फिल्मों में शाम 6 बजे के बाद शूटिंग नहीं की जाती है। मुझे नहीं पता कि अब भी यह नियम है या नहीं क्योंकि पिछले दो-तीन साल से मैंने कोई तेलुगु फिल्म नहीं की है। पहले हम सिर्फ शाम 6 बजे तक ही शूटिंग करते थे। यह नियम कलाकारों और क्रू के लिए एक निश्चित कार्य-जीवन संतुलन सुनिश्चित करता था। इसके विपरीत, उन्होंने हिंदी सिनेमा की शूटिंग टाइमिंग को लेकर अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, जब मैं मुंबई आई, तो मुझे अचरज हुआ कि यहां रात में भी लंबी शूटिंग होती है। साउथ में अगर रात की शूटिंग होती भी है, तो वह आमतौर पर शाम 6 बजे से रात 2 बजे तक सीमित रहती है, न कि सुबह 6 बजे तक। यह अंतर अक्सर हिंदी सिनेमा के लंबे कार्यदिवसों को दर्शाता है, जहां देर रात तक काम करना एक आम बात है। अभिनेत्री ने अपनी बातचीत में हिंदी सिनेमा के यूनियन नियमों का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया, यहां कुछ यूनियनों के नियमों के मुताबिक तय समय के बाद ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं। शाम 6 बजे के बाद शूटिंग करने पर डेढ़ गुना पेमेंट करना पड़ता है। रात 9 बजे के बाद पेमेंट दोगुना ज्यादा हो जाता है और अगर रात 2 बजे के बाद भी शूटिंग जारी रखी जाए, तो तीन गुना पैसे देने पड़ते हैं। यह नियम क्रू मेंबर्स और कलाकारों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं ताकि अतिरिक्त काम के लिए उन्हें उचित मुआवजा मिल सके। उन्होंने आगे कहा, यही कारण है कि फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को तीन गुना ज्यादा पैसे मिलते हैं क्योंकि यह समय लोगों के लिए सही नहीं माना जाता है। शुरुआती सालों में जब मैं दोनों जगहों पर आती-जाती थी, तो सोचती थी कि यहां इतनी देर तक शूटिंग क्यों की जा रही है। मुझे पता नहीं था कि यहां साउथ वाले नियम लागू नहीं होते। इसलिए यहां शूटिंग सुबह जल्दी शुरू कर दी जाती है। सुदामा/ईएमएस 25 अप्रैल 2026