यूएस-ईरान के बीच तनाव रोकने के प्रयास इस्लामाबाद,(ईएमएस)।पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस समय वैश्विक कूटनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन गई है, जहाँ अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे की हलचलें तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक महत्वपूर्ण मिशन पर इस्लामाबाद पहुंचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार और स्वयं आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने किया। यह दौरा ऐसे नाजुक मोड़ पर हो रहा है जब दोनों देशों के बीच युद्ध के बाद भरोसे की भारी कमी है, फिर भी कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। पाकिस्तान इस पूरे परिदृश्य में खुद को एक कुशल मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है और उसकी कोशिश है कि दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच सीधी बातचीत का मंच तैयार किया जा सके। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस कूटनीतिक अवसर को भांपते हुए अपने भरोसेमंद रणनीतिकारों को मैदान में उतारा है। ट्रंप प्रशासन ने अपने मध्य-पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर को इस्लामाबाद भेजा है ताकि वे ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत के दूसरे दौर की संभावनाओं को तलाश सकें। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि ये दूत ईरान की बात सुनने और भविष्य की राह तैयार करने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस मिशन पर भेजा था, लेकिन वह वार्ता विफल रही थी। इस बार कुशनर और विटकॉफ की जोड़ी पर ट्रंप ने दांव लगाया है, जो संकेत देता है कि अमेरिका इस डील को लेकर बेहद गंभीर है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हालिया संकेतों में यह भी कहा है कि ईरान एक नया प्रस्ताव पेश कर सकता है, जो अमेरिकी शर्तों के करीब हो सकता है। अमेरिका की स्पष्ट मांग है कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को पूरी तरह खत्म करे और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति को निर्बाध रहने दे। हालांकि, बातचीत की इस टेबल के साथ-साथ अमेरिका ने आर्थिक और सैन्य दबाव भी बरकरार रखा है। ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी अभी भी जारी है, जिसे कूटनीतिक विशेषज्ञों द्वारा ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब्बास अराघची का यह दौरा पाकिस्तान के बाद रूस तक भी फैलेगा, जो बताता है कि ईरान एक व्यापक कूटनीतिक घेरा तैयार कर रहा है। अब दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद से निकलने वाले नतीजों पर टिकी हैं कि क्या यह साइलेंट वार कूटनीति के जरिए किसी स्थाई समाधान तक पहुंच पाएगा या नहीं। वीरेंद्र/ईएमएस/25अप्रैल2026 ---------------------------------