जम्मू(ईएमएस)। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध सुरक्षा बलों की रणनीति अब एक निर्णायक और रणनीतिक मोड़ पर पहुंच गई है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए अपने ऑपरेशंस का मुख्य केंद्र शहरी बस्तियों से हटाकर घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित कर दिया है। सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती में आई भारी गिरावट है। आधिकारिक आंकड़ों और सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में घाटी में स्थानीय आतंकी न के बराबर रह गए हैं। यदि कहीं से इक्का-दुक्का भर्ती की सूचना मिलती भी है, तो सुरक्षा बल तुरंत सक्रिय होकर उसे विफल कर देते हैं। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय समर्थन और भर्ती में कमी आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि घाटी में आतंकवाद के प्रति सामाजिक नजरिया बदला है। हालांकि, विदेशी आतंकियों की चुनौती अब भी बनी हुई है, जिनकी संख्या लगभग 65 के आसपास आंकी गई है। सुरक्षा एजेंसियां केवल आतंकियों को ही नहीं, बल्कि उनके पीछे काम करने वाले सपोर्ट सिस्टम और कट्टरपंथ फैलाने वाले तत्वों पर भी कड़ी नजर रख रही हैं। हालिया घटनाओं के बाद से अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है ताकि नए युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें गलत रास्ते पर न धकेला जा सके। आतंकी संगठनों द्वारा अपनी रणनीति बदलते हुए घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों को सुरक्षित ठिकाना बनाने की कोशिशों के जवाब में सुरक्षा बलों ने जंगल वॉरफेयर पर ध्यान केंद्रित किया है। अब सात हजार फीट तक की ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में नए ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए गए हैं। विशेष रूप से जम्मू के चिनाब वैली जैसे क्षेत्रों में, जहाँ हाल के दिनों में हलचल बढ़ी थी, सुरक्षा बलों की मौजूदगी और सर्च ऑपरेशन को और अधिक सघन बनाया गया है। इस नई मुहिम को प्रभावी बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप का पुनर्गठन किया गया है। इसमें ऊर्जावान युवा अधिकारियों को शामिल किया गया है जिन्हें जंगल युद्ध और काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशंस के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन टीमों को आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध ग्रे हाउंड्स यूनिट और सेना की पैरा स्पेशल फोर्सेज के साथ समन्वय कर प्रशिक्षित किया गया है। तकनीक, युवा नेतृत्व और दुर्गम क्षेत्रों में मजबूत पकड़ की यह त्रिआयामी रणनीति जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/25अप्रैल2026