- विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी बाजार की नजर रहेगी मुंबई (ईएमएस)। पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजारों में देखी गई गिरावट के बाद आने वाला सप्ताह निवेशकों के लिए वैश्विक घटनाक्रमों और घरेलू कॉरपोरेट नतीजों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव, रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक दुनियाभर के बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार की दिशा भी तय करेगी। बाजार में एक बार फिर वैश्विक कारकों का प्रभाव देखने को मिलेगा, जिससे निवेशकों को सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज होने के बाद अब निवेशकों की नजरें पूरी तरह से वैश्विक घटनाक्रमों पर केंद्रित हो गई हैं। भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों से जुड़े संकेत बाजार की आगामी चाल को निर्धारित करेंगे। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में कोई ठोस प्रगति न होना है। इसके साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध पर भी बाजार पैनी नजर रख रहा है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका बंद रहना या वहां तनाव बढ़ना वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता ला सकता है, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था और कंपनियों पर पड़ेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा सकती हैं और कॉर्पोरेट मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। 28 और 29 अप्रैल को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक का बाजार बेसब्री से इंतजार कर रहा है। हालांकि, पिछली लगातार दो बैठकों की तरह इस बार भी ब्याज दरों को 0-0.25 फीसदी की रेंज में स्थिर रखने की उम्मीद है, लेकिन फेड के चेयरमैन की टिप्पणियां और भविष्य की मौद्रिक नीति पर उनके संकेत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इससे यह अंदाजा लगेगा कि ब्याज दरें कब तक स्थिर रहेंगी या उनमें बदलाव की उम्मीद कब तक की जा सकती है, जिसका वैश्विक पूंजी प्रवाह पर सीधा असर पड़ेगा। घरेलू मोर्चे पर, चौथी तिमाही के परिणाम सीजन के जोर पकड़ने के साथ, निवेशकों की नजर कंपनियों के प्रदर्शन पर रहेगी। अच्छे नतीजे बाजार को समर्थन दे सकते हैं, जबकि निराशाजनक आंकड़े दबाव बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी नजर रहेगी। पिछले सत्रों में मुनाफावसूली करने वाले विदेशी निवेशकों का रुख (बिकवाली या खरीदारी) अगले सप्ताह बाजार की दिशा को काफी हद तक प्रभावित करेगा। उनकी लगातार बिकवाली बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकती है। तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए 24,100-24,400 के दायरे में समेकन देखने को मिल सकता है। 24,000 के स्तर पर तत्काल समर्थन मौजूद है, जो बाजार को बड़ी गिरावट से बचा सकता है। वहीं 24,400 से ऊपर टिकने पर निफ्टी 24,800-25,000 के स्तर तक की तेजी दिखा सकता है, लेकिन इसके लिए सकारात्मक वैश्विक संकेतों और मजबूत घरेलू नतीजों की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर आने वाला सप्ताह सतर्कता भरा रहने की उम्मीद है, जहां वैश्विक कारक और कंपनियों के नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। सतीश मोरे/26अप्रैल ---