क्षेत्रीय
26-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली पुलिस ने 1986 में पत्नी की हत्या कर फरार हुए 84 वर्षीय आरोपी चंद्रशेखर प्रसाद को 40 साल बाद गिरफ्तार किया है। आरोपी ने शक के आधार पर ईंटों से सिर कुचलकर पत्नी की हत्या की थी। बिना किसी डिजिटल रिकॉर्ड या मोबाइल ट्रैकिंग के, पुलिस ने सर्विलांस और ग्राउंड इंटेलिजेंस के जरिए उसे दिल्ली के अलीपुर से दबोचा। कानून के हाथ लंबे होते हैं, यह कहावत दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर सच कर दिखाई है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे बुजुर्ग को गिरफ्तार किया है, जिसने आज से 40 साल पहले अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी थी। 84 वर्षीय आरोपी चंद्रशेखर प्रसाद 1986 से पुलिस को चकमा दे रहा था, लेकिन डिजिटल सर्विलांस और पुराने ह्यूमन इंटेलिजेंस के जाल ने आखिरकार उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। मामला 19 अक्टूबर 1986 का है। बिहार के नालंदा का रहने वाला चंद्रशेखर प्रसाद दिल्ली के शकरपुर इलाके में अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह एक अखबार में कंपोजर के तौर पर काम करता था। पुलिस के मुताबिक, चंद्रशेखर को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर)। इसी शक की आग में जलते हुए उसने खौफनाक साजिश रची। घटना वाले दिन, प्रसाद ने अपने साथियों के साथ मिलकर पहले घर के नौकर को बंदूक की नोक पर बंधक बनाया और फिर अपनी पत्नी के सिर पर ईंटों से वार कर उसकी निर्मम हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद वह दिल्ली से रफूचक्कर हो गया। जांच अधिकारियों के लिए यह केस किसी भूलभुलैया से कम नहीं था। 1986 के दौर में न तो मोबाइल फोन थे, न आधार जैसा कोई डेटाबेस और न ही सीसीटीवी कैमरों का जाल। आरोपी की उस वक्त की धुंधली तस्वीरों के अलावा पुलिस के पास कुछ नहीं था। इन 40 सालों में आरोपी ने पंजाब, हरियाणा, बिहार और दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में अपनी पहचान बदलकर वक्त गुजारा। वह कभी किसी फैक्ट्री में छिपता तो कभी धार्मिक आयोजनों की भीड़ में खो जाता। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/26/ अप्रैल /2026