अंतर्राष्ट्रीय
26-Apr-2026


2050 तक 700 प्रतिशत गरीब लोग आएंगे गर्मी के चपेट में नई दिल्ली(ईएमएस)। विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में एक डरावने आंकड़े सामने आए है। 2050 तक शहरों में रहने वाले गरीब लोगों की संख्या जो खतरनाक गर्मी झेल रही होगी, वह 700 प्रतिशत बढ़ जाएगी। इसका मतलब है कि आज जितने गरीब गर्मी से प्रभावित हैं, उससे सात गुना ज्यादा लोग 2050 में इस आग में जलेंगे। सबसे ज्यादा खतरा पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के शहरों पर है। यहां गरीब परिवार, बाहर काम करने वाले मजदूर, बुजुर्ग और बच्चे सबसे पहले शिकार होंगे। अगर अभी कुछ नहीं किया गया तो हीटवेव और ज्यादा तेज और लंबी होंगी। लोग मरेंगे, परिवार बिखरेंगे और पूरा शहर ठप हो जाएगा। आज दुनिया के शहरों में गर्मी एक साइलेंट किलर की तरह फैल रही है। खासकर ग्लोबल साउथ यानी गरीब देशों के शहरों में यह समस्या बहुत भयानक हो गई है। तेजी से बढ़ते शहर, कम संसाधन और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्मी अब रोजमर्रा की जिंदगी को तबाह कर रही है। लोग काम नहीं कर पा रहे। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। बीमार लोग अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे। गर्मी से बिजली की मांग इतनी बढ़ जाती है कि पूरे सिस्टम पर बोझ पड़ता है। प्रदूषण भी बढ़ता है। शहरों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट की वजह से तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो जाता है। यह गर्मी अब सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि मौत, बेरोजगारी और भुखमरी का कारण बन रही है। अगर कुछ नहीं किया तो क्या होगा? गर्मी पर काबू न करने का खामिया बहुत भयानक होगा। काम-धंधा ठप हो जाएगा। स्कूल बंद पड़ जाएंगे। अस्पतालों में मरीजों की लाइन लग जाएगी। गर्मी से बिजली की मांग इतनी बढ़ेगी कि बिजली संकट गहरा जाएगा। प्रदूषण बढ़ेगा। गरीबी और असमानता बढ़ेगी। लोग शहर छोडक़र भागने लगेंगे। आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन बढ़ेगा। अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। विश्व बैंक का कहना है कि गर्मी अब सिर्फ मौसमी परेशानी नहीं है। यह शहरों की पूरी व्यवस्था को चूर-चूर कर देगी। अगर शहर अभी तैयार नहीं हुए तो लाखों लोग बेघर हो जाएंगे, भूखे मरेंगे और गर्मी की वजह से मौतें आम हो जाएंगी। अभी कदम उठाए बिना शहर बच नहीं सकते हैंडबुक साफ कहती है कि शहरों को अब गर्मी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसे मौसमी तकलीफ मानकर नजरअंदाज करने से पूरा शहर बर्बाद हो सकता है। ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, छतों पर बगीचे, बेहतर शहर नियोजन और गरीबों तक सस्ती कूलिंग पहुंचाना जरूरी है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि गर्मी अब रोजमर्रा की जिंदगी को बदल रही है। अगर शहर अभी सक्रिय नहीं हुए तो 2050 तक गर्मी लाखों गरीबों की जिंदगी छीन लेगी। विश्व बैंक की यह हैंडबुक शहरों के लिए अंतिम चेतावनी है। अब समय है कि सरकारें, शहर प्रशासन और लोग मिलकर इस डरावने संकट से लड़ें। वरना आने वाले सालों में शहर आग के समंदर बन जाएंगे जहां सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। विनोद उपाध्याय / 26 अप्रैल, 2026