अंतर्राष्ट्रीय
26-Apr-2026


अमेरिका नाकाबंदी हटाए, तभी होगी वार्ता तेहरान(ईएमएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ सीधे वार्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक कोई भी प्रत्यक्ष बातचीत मुमकिन नहीं है। उन्होंने यूएस के साथ सीधी बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के साथ फोन पर हुई अहम बातचीत में उन्होंने यह बात दोहराई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति के मार्ग में मुख्य बाधा संवाद की कमी नहीं, बल्कि वाशिंगटन द्वारा वर्तमान में की जा रही शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयां हैं। पेजेश्कियन ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या आर्थिक-सैन्य नाकाबंदी के तहत बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में असली समस्या संवाद की कमी नहीं, बल्कि अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीतियां हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका की शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयां और दबाव बंद नहीं होते, तब तक भरोसे का माहौल बनाना और बातचीत को आगे बढ़ाना मुश्किल रहेगा। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका को सलाह देते हुए कहा कि यदि वह बातचीत को फिर से शुरू करना चाहता है, तो सबसे पहले उसे नौसैनिक नाकाबंदी सहित सभी सैन्य और आर्थिक बाधाएं हटानी होंगी। उनके मुताबिक, यही कदम विश्वास बहाली की दिशा में पहला संकेत होगा।उन्होंने आगे कहा ‘अमेरिका को हमारी सलाह है कि वह पहले नौसैनिक नाकाबंदी सहित बाधाओं को दूर करे, ताकि संवाद फिर से शुरू हो सके और मुद्दों को सुलझाने के लिए एक मंच प्रदान किया जा सके’। आठ हफ्तों से जारी तनाव यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव पिछले आठ हफ्तों से लगातार बढ़ रहा है। 13 अप्रैल से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के चलते ईरान के कई बंदरगाह प्रभावित हुए हैं। इससे पहले इस्लामाबाद में हुई उच्च स्तरीय शांति वार्ता भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी थी, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। ट्रंप ने कही ये बात इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉप की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी। उन्होंने इस फैसले को महंगा और लंबा बताते हुए कहा कि ऐसे अधिकारियों से मिलने का कोई मतलब नहीं जिनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान सीमित हो। पाम बीच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बोलते हुएट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान का प्रस्ताव काफी था, लेकिन पर्याप्त नहीं, खासकर उस अमेरिकी मांग के संदर्भ में जिसमें 20 सालों तक यूरेनियम संवर्धन रोकने की बात कही गई है। दरअसल ट्रंप ने वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी थी, जो वार्ता के एक नए दौर के लिए इस्लामाबाद जाने वाले थे। उन्होंने लंबी यात्रा अवधि, उच्च लागत और प्रस्तावित बैठकों में ईरान के वरिष्ठ नेतृत्व की अनुपस्थिति का हवाला दिया था। ‘वाशिंगटन की मूल मांग में बदलाव नहीं’ ट्रंप ने खुद को खर्च के प्रति सजग व्यक्ति बताते हुए कहा कि हम ऐसे लोगों से मिलने के लिए 15-16 घंटे की यात्रा नहीं करने जा रहे हैं जिनके बारे में पहले किसी ने कभी सुना भी नहीं है। समझौते के रद्द होने के बावजूद, ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने तुरंत एक संशोधित और कहीं बेहतर प्रस्ताव प्रस्तुत किया और इस बात को दोहराया कि वाशिंगटन की मूल मांग अपरिवर्तित है। ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। उन्होंने युद्धविराम को लेकर चिंताओं को भी खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने इसके बारे में सोचा भी नहीं है। इस्लामाबाद से वापस लौटा ईरान प्रतिनिधिमंडल इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि तेहरान ने संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ एकव्यावहारिक ढांचा साझा किया है। हालांकि उन्होंने अमेरिका की कूटनीतिक प्रतिबद्धता पर सवाल भी उठाए। ईरानी प्रतिनिधिमंडल मांगों की एक आधिकारिक सूची प्रस्तुत करने के बाद इस्लामाबाद से वापस लौट गया। जिससे पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें फिलहाल अनिश्चित नजर आ रही हैं। पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों पर अनिश्चितता छा गई। विनोद उपाध्याय / 26 अप्रैल, 2026