ज़रा हटके
27-Apr-2026
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-विशेषज्ञों ने जताई चिंता कहा- लोगों को इसके प्रति शिक्षित करने की जरुरत इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान में एचआईवी का खतरा बड़े स्तर पर बढ़ता जा रहा है और यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के एचआईवी सेंटर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मरीजों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों में एचआईवी के बढ़ते मामलों को अत्यधिक गंभीर बताया है। इसके साथ ही विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि बीमारी को छिपाना और टेस्ट न करवाना एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य का खतरा पैदा करता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबक पुरुषों में एचआईवी के मामले महिलाओं की तुलना में ज्यादा सामने आ रहे हैं, जो एक विशिष्ट पैटर्न को इंगित करता है। पाकिस्तानी मीडिया ने बताया कि एड्स कंट्रोल कार्यक्रम के प्रोग्राम मैनेजर जुबैर अब्दुल्ला ने कहा कि पीआईएमएस एचआईवी सेंटर में मामलों में बढ़ोतरी का एक मुख्य कारण यह है कि अब ज्यादा लोग टेस्टिंग के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को एचआईवी से बचाव के तरीकों के बारे में तुरंत शिक्षित करने की जरुरत है और सभी जगहों पर टेस्टिंग में बढ़ोतरी को एक सकारात्मक कदम बताया, क्योंकि यह बीमारी की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा, रेगुलेशन और समन्वय मंत्रालय द्वारा जारी डेटा के मुताबिक अक्टूबर 2025 से अब तक 189 लोगों के एचआईवी-पॉजिटिव होने की रिपोर्ट दर्ज हुई है। अप्रैल के पहले 20 दिनों में ही 11 नए मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा थी, ट्रांसजेंडर लोगों में भी मामले सामने आए, जबकि बच्चों में एचआईवी का पता चलना चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह संक्रमण अक्सर स्वास्थ्य प्रणालियों में लापरवाही का परिणाम होता है। पिछले हफ्ते एक नई जांच रिपोर्ट में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक सरकारी अस्पताल के बच्चों के वार्ड में गंभीर लापरवाही का खुलासा हुआ, जिसने इस संकट की जड़ें उजागर कर दीं। रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में ताऊंसा स्थित तहसील हेडक्वार्टर हॉस्पिटल का बच्चों में एचआईवी फैलने से संबंध सामने आया था। उस समय प्रांतीय अधिकारियों ने कार्रवाई का भरोसा दिया था और मार्च 2025 में अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को निलंबित भी कर दिया गया था। हालांकि, कुछ महीनों बाद एक व्यापक जांच से सामने आया कि बच्चों की सुरक्षा अब भी खतरे में बनी हुई थी। जांच में बुनियादी इन्फेक्शन कंट्रोल मानकों के बार-बार और गंभीर उल्लंघन का पता चला। रिपोर्ट के मुताबिक स्टाफ सुरक्षा से संबंधित तय मानकों का अनुसरण किए बिना मेडिकल वेस्ट संभाल रहा है, सिरिंज और सुइयां खुली पड़ी हैं और अयोग्य वॉलंटियर बिना किसी निगरानी के काम कर रहे हैं। स्टाफ की कमी और सप्लाई की समस्याएं इस स्थिति में योगदान दे रही हैं। कुछ मामलों में, परिवारों को अपनी दवाएं खुद खरीदने के लिए कहा जाता है। दबाव में, स्टाफ इक्विपमेंट का दोबारा इस्तेमाल करते हैं या कम सप्लाई को बनाए रखने के लिए मरीजों के बीच दवाएं शेयर करते हैं। वीडियो फुटेज के बावजूद अस्पताल के अधिकारियों ने ऐसी लापरवाहियों को मानने से इनकार किया है। मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने दावा किया है कि फुटेज शायद उनके समय से पहले रिकॉर्ड की गई हो या शायद नकली हो, जिससे जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं। सिराज/ईएमएस 27 अप्रैल 2026