ज़रा हटके
27-Apr-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी नई और महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष रणनीति का खुलासा किया है, जिसके तीन मुख्य स्तंभ तय किए गए हैं। इस रणनीति के तहत 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चंद्रमा की सतह पर उतारना, वहां एक स्थायी मानव आधार (बेस) स्थापित करना और पृथ्वी की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार करना शामिल है। नासा के प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने स्पष्ट किया कि यह योजना तेजी से बदलते वैश्विक प्रतिस्पर्धी माहौल में अमेरिका के नेतृत्व को बरकरार रखने के लिए तैयार की गई है। आइजकमैन के अनुसार, नासा अब केवल चंद्रमा तक पहुंचने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वहां लंबी अवधि के लिए इंसानी मौजूदगी सुनिश्चित करने की योजना बना रही है। इसके लिए निजी कंपनियों के साथ मिलकर लैंडर, रोवर, पावर सिस्टम और उन्नत संचार प्रौद्योगिकियों पर काम किया जाएगा। रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लो-अर्थ ऑर्बिट में निजी स्पेस स्टेशनों को बढ़ावा देना है, ताकि नासा अपना पूरा ध्यान डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन (गहरे अंतरिक्ष की खोज) और न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसे जटिल मिशनों पर केंद्रित कर सके। प्रशासक ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले मिशनों में लागत बढ़ने और देरी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसलिए, अब नासा बड़े और भारी-भरकम प्रोजेक्ट्स के बजाय छोटे, परिणामोन्मुखी और कम खर्चीले निवेश पर ध्यान देगी। उन्होंने कहा कि मिशनों के बीच के अंतराल को कम करने के लिए लॉन्च की संख्या बढ़ाई जाएगी। हाल ही में सफल रहे आर्टेमिस II मिशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह सही कार्यान्वयन से बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। हालांकि, इस नई रणनीति के सामने वित्तीय चुनौतियां भी हैं। प्रस्तावित बजट में करीब 23 प्रतिशत की कटौती पर अमेरिकी सांसदों ने गहरी चिंता जताई है। स्पेस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने चेतावनी दी है कि कम फंडिंग से अमेरिका की अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब चीन अपने चंद्र मिशनों को बहुत आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहा है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों ने निजी कंपनियों पर बढ़ती निर्भरता और विज्ञान के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इन चिंताओं के बीच, नासा ने भरोसा दिलाया है कि वह संसाधनों के पारदर्शी इस्तेमाल और मुख्य लक्ष्यों पर फोकस करके कम बजट में भी बेहतर नतीजे देने के लिए प्रतिबद्ध है। 1958 में अपनी स्थापना के बाद से अंतरिक्ष खोज का नेतृत्व करने वाली यह संस्था अब 1972 के बाद पहली बार मानव को चंद्रमा पर भेजने के ऐतिहासिक मिशन की ओर बढ़ रही है। वीरेंद्र/ईएमएस 27 अप्रैल 2026