ज़रा हटके
27-Apr-2026
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सैन फ्रांसिस्को (ईएमएस)। अमेरिका में वन्यजीवों की आबादी को लगभग खत्म कर चुके अजगरों से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनूठा और कुछ हद तक डरावना रास्ता चुना है, जो सुनने में काफी अजीब लग सकता है। रिसर्चर्स अब ओपोसम नामक मार्सुपियल जानवरों को चारे के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं। इन ओपोसम जानवरों के शरीर पर विशेष ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे ताकि जब कोई अजगर इन्हें अपना निवाला बनाए, तो वैज्ञानिक सीधे उस शिकारी सांप तक पहुंच सकें। यह असाधारण विचार तब आया जब शोधकर्ताओं ने पाया कि उनके अध्ययन में शामिल कई ओपोसम पहले ही अजगरों का शिकार बन चुके थे। अब इसी प्राकृतिक आपदा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। फ्लोरिडा के एवरग्लेड्स जैसे दलदली और घने इलाकों में 20 फीट तक लंबे बर्मीज पायथन को ढूंढना किसी घास के ढेर में सुई खोजने जैसा मुश्किल काम है। ये सांप अपनी छिपने की कला में इतने माहिर होते हैं कि सालों से विशेषज्ञों द्वारा आजमाए गए रोबोटिक खरगोशों से लेकर विभिन्न प्रकार के जालों तक, कोई भी तरीका इन्हें पकड़ने में कामयाब नहीं हो पाया है। ये बर्मी अजगर वहां के स्थानीय जानवरों को लगातार खाकर अपनी आबादी तेजी से बढ़ा रहे हैं, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन बुरी तरह बिगड़ रहा है। इंसान इन खतरनाक दलदलों में आसानी से प्रवेश नहीं कर सकते, जबकि ओपोसम जैसे स्थानीय जानवर वहां बेखौफ घूमते हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने अब ओपोसम को अपना जासूस बनाने का साहसिक फैसला किया है। नॉर्थ कैरोलिना म्यूजियम ऑफ नेचुरल साइंसेज के बायोलॉजिस्ट ए.जे. संजर और माइकल कोव इस अभिनव प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले एक ट्रैकर की लागत करीब 1,500 डॉलर होती थी, जो इस परियोजना के लिए बहुत महंगी पड़ती थी। लेकिन अब उन्होंने सिर्फ 190 डॉलर वाले सस्ते कॉलर तैयार किए हैं। इन विशेष ट्रैकर्स को ओपोसम के गले में सुरक्षित रूप से बांधकर उन्हें घने जंगलों में छोड़ दिया जाएगा। जैसे ही कोई भूखा अजगर इस जानवर को निगलेगा, वह अनजाने में एक सक्रिय जीपीएस ट्रैकर को भी निगल जाएगा। वैज्ञानिक इस सिग्नल को लगातार ट्रैक करेंगे और अजगर के पेट के अंदर से आ रही आवाज उन्हें सीधे उस विशालकाय सांप तक पहुंचा देगी। इसके बाद उस अजगर को पकड़कर मार दिया जाएगा, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस मिशन को लेकर कुछ लोगों द्वारा नैतिक सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि क्या यह जानवरों के साथ क्रूरता नहीं है। लेकिन क्रोकोडाइल लेक नेशनल वाइल्डलाइफ रिफ्यूज के मैनेजर जेरेमी डिक्सन का स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी जानवर को जानबूझकर खतरे में नहीं डाल रहे हैं। उनका तर्क है कि खतरा वहां पहले से मौजूद है और अजगर वैसे भी इन ओपोसम जैसे जानवरों को अपना शिकार बना ही रहे हैं। वैज्ञानिक बस उस प्राकृतिक प्रक्रिया को दस्तावेजित कर रहे हैं ताकि पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन को फिर से स्थापित किया जा सके। इस गर्मी के अंत तक लगभग 40 ओपोसम को इस महत्वपूर्ण मिशन पर तैनात करने की योजना है। यदि यह अभिनव प्रयोग सफल रहता है, तो फ्लोरिडा के जंगलों से इन घुसपैठिए और विनाशकारी अजगरों का सफाया करना काफी आसान हो जाएगा, जिससे स्थानीय वन्यजीवों को एक नई उम्मीद मिलेगी। बता दें कि अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में दशकों से बर्मीज पायथन, जिन्हें बर्मी अजगर भी कहा जाता है, ने जबरदस्त आतंक मचा रखा है। ये विशाल और खतरनाक सांप स्थानीय वन्यजीवों की आबादी को लगभग पूरी तरह से खत्म कर चुके हैं। सुदामा/ईएमएस 27 अप्रैल 2026