नई दिल्ली (ईएमएस)। छोटे बच्चों को पढ़ाते समय धैर्य और समझदारी से काम लेना होता है, क्योंकि बच्चे अपनी भावनाओं को पूरी तरह से व्यक्त नहीं कर पाते। कई बार ऐसा होता है कि बच्चे अचानक ही बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं, पढ़ाई के नाम पर सुस्त पड़ जाते हैं। एक्सपर्ट की माने तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ा और अनदेखा कारण अक्सर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव महसूस करना होता है। जब बच्चे अपनी भावनाओं को ठीक से बयां नहीं कर पाते, तो उनके व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिलता है। वे पढ़ते समय चिड़चिड़े हो जाते हैं, बहुत ज्यादा गुस्सा करने लगते हैं, या बार-बार थका हुआ महसूस करते हैं। बहुत से माता-पिता इसे बच्चों का आलस मान लेते हैं, लेकिन यह अक्सर आलस नहीं, बल्कि पढ़ाई के अत्यधिक दबाव का परिणाम होता है। इस दबाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं: माता-पिता की बहुत ज्यादा उम्मीदें जो बच्चे की क्षमता से अधिक हों, बार-बार बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करना जिससे उसमें हीन भावना आती है, बिना ब्रेक लिए लगातार पढ़ाई करवाना जिससे दिमाग थक जाता है, या छोटी सी गलती पर बच्चे को ज्यादा डांट पड़ना जिससे उसका आत्मविश्वास टूटता है। ऐसे में बच्चा पढ़ाई से भागता नहीं है, बल्कि पढ़ाई के नाम से डरने लगता है, जो उसके सीखने की प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। अब सवाल यह है कि ऐसे में माता-पिता बच्चे को कैसे समझें और उसकी मदद कैसे करें। इसके लिए माता-पिता को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं। बच्चे से खुलकर बात करें और यह जानने की कोशिश करें कि उसके मन में क्या चल रहा है और वह किस चीज से परेशान है। एक सुरक्षित और खुला माहौल बनाना आवश्यक है जहाँ बच्चा अपनी चिंताओं को साझा करने में सहज महसूस करे। दूसरा, पढ़ाई के वक्त बच्चे के साथ सख्ती न बरतें। ज्यादा सख्ती बरतने से बच्चा मन से कमजोर और डरा हुआ महसूस करने लगता है, जिससे उसकी सीखने की क्षमता और इच्छा दोनों प्रभावित होती हैं। इसलिए, बच्चों को प्यार से पढ़ाने और समझाने की कोशिश करें। ऐसा करने से बच्चे का आधा स्ट्रेस अपने-आप ही खत्म हो जाता है और वह पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने लगता है। इसके साथ ही, बच्चे की जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव करना भी जरूरी है। बच्चों को रोज सुबह कुछ भिगोए हुए बादाम और अखरोट खाने के लिए जरूर दें। ये मेवे मस्तिष्क के विकास के लिए उत्कृष्ट होते हैं और बच्चे का दिमाग तेज करने के साथ-साथ पढ़ाई में मन लगाने में भी मदद करते हैं। बच्चों को प्रकृति के साथ भी जोड़ें और उनकी शारीरिक गतिविधि को भी बढ़ाएं। उन्हें ऐसे खेल खेलने दें जिससे बच्चे का शारीरिक विकास तेजी से हो। सुदामा/ईएमएस 27 अप्रैल 2026