राष्ट्रीय
27-Apr-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय सशस्त्र बलों में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढा़ दिया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स बनाने का औपचारिक प्रस्ताव सौंप दिया है। यह प्रस्ताव कई महीनों की विस्तृत समीक्षा, तीनों सेनाओं-थल सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुखों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श के बाद तैयार हुआ है। यह सुधार भारतीय रक्षा व्यवस्था में आजादी के बाद का सबसे बड़ा पुनर्गठन बताया जा रहा है। इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, तेज निर्णय प्रक्रिया और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना है। थिएटर कमांड क्या है? थिएटर कमांड एक ऐसी सैन्य संरचना है जिसमें देश को रणनीतिक दृष्टि से कुछ बड़े क्षेत्रों (थिएटर) में बांटा जाता है। प्रत्येक थिएटर की कमान एक चार-स्टार अधिकारी के पास होती है, जिसके अधीन थल सेना, नौसेना और वायु सेना की संयुक्त इकाइयाँ काम करती हैं। वर्तमान व्यवस्था में तीनों सेनाएँ अलग-अलग ढंग से काम करती हैं—थल सेना जमीन पर, नौसेना समुद्र में और वायु सेना आकाश में दम दिखाती है। लेकिन आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में तीनों सेनाओं के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता होती है। थिएटर कमांड मॉडल इसी समन्वय को एकीकृत और प्रभावी बनाने का प्रयास है। सीडीएस के प्रस्ताव में चार-स्टार रैंक के थिएटर कमांडरों की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है, जो तीनों सेनाओं के प्रमुखों के समकक्ष स्तर पर होगा। प्रत्येक थिएटर में तीनों सेनाओं के सैनिक, हथियार, विमान, जहाज और अन्य संसाधन एकीकृत रूप से काम कर सकते है। इसके साथ ही वाइस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जैसे नए पदों के निर्माण की भी बात कही गई है, ताकि संचालन और प्रशासनिक कार्यों में संतुलन बना रहे। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ रणनीतिक वायु सेना संपत्तियाँ राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली से नियंत्रित रहेंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी भी थिएटर में तेजी से तैनात किया जा सके। वेस्टर्न थिएटर कमांड: यह पाकिस्तान की सीमा से जुड़े क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। इसमें वायु सेना की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। नॉर्दर्न थिएटर कमांड: यह चीन सीमा से संबंधित क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालेगा और इसमें थल सेना की प्रमुख भूमिका होगी। मैरीटाइम थिएटर कमांड: यह समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र की निगरानी करेगा, जिसकी कमान नौसेना के पास होगी। इन तीनों थिएटरों में तीनों सेनाओं की संयुक्त कार्यप्रणाली लागू होगी, जिससे किसी भी संकट या युद्ध की स्थिति में तेजी से और समन्वित प्रतिक्रिया दी जा सके। यह प्रस्ताव अब रक्षा मंत्रालय के विचाराधीन है। इसके बाद इस प्रस्ताव को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इतना ही नहीं सीडीएस द्वारा जल्द ही जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें तीनों सेनाओं के शीर्ष नेतृत्व को इस नई संरचना और भविष्य की रणनीति से अवगत कराया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, थिएटर कमांड सिस्टम लागू होने से भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे न केवल निर्णय लेने की गति बढ़ेगी, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा। साथ ही, तीनों सेनाओं के बीच समन्वय मजबूत होगा और संयुक्त अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ेगी। आशीष दुबे / 27 अप्रैल 2026