* 1-2 मई को सूरत की ऑरो यूनिवर्सिटी में निवेश, नवाचार और उद्योग विस्तार पर मंथन * ‘सिल्क सिटी’ Surat का रु.1.5 लाख करोड़ टेक्सटाइल कारोबार, लाखों लोगों को रोजगार * नई टेक्सटाइल पॉलिसी और सरकारी सब्सिडी से Gujarat को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी सूरत (ईएमएस)| दक्षिण गुजरात के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई देने के लिए आगामी 1 और 2 मई 2026 को सूरत की ऑरो यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी)’ एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। इस महत्वाकांक्षी प्रयास से टेक्सटाइल सहित प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा, वैश्विक खरीदारों और स्थानीय उत्पादकों के बीच सीधा संपर्क बढ़ेगा तथा नई तकनीक और नवाचार के आदान-प्रदान से सूरत सहित पूरे दक्षिण गुजरात के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी। जिसकी मिट्टी में व्यापार और हवा में साहस है, ऐसी सूर्यपुत्री तापी नदी के किनारे बसे सूरत शहर ने मुगल काल से अपनी भौगोलिक और ऐतिहासिक विशेषताओं के कारण विश्व के व्यापार मानचित्र पर स्थान बनाया था। 16वीं सदी में एक समृद्ध बंदरगाह के रूप में प्रसिद्ध सूरत आज 21वीं सदी में विश्व का सिल्क सिटी बन चुका है। सूरत को सिल्क सिटी का दर्जा मिलने के पीछे एक समृद्ध इतिहास है। सदियों पहले सूरत बंदरगाह से रेशमी कपड़ों का व्यापार अरब और यूरोप के देशों तक होता था। सूरत ने रियल सिल्क के साथ-साथ मैन-मेड फाइबर (MMF) यानी आर्ट-सिल्क में भी महारत हासिल की है। भारत में बनने वाले कुल आर्टिफिशियल सिल्क का 90 प्रतिशत उत्पादन अकेला सूरत करता है। सिल्क में सूरत की व्यावसायिक कुशलता उसे सिल्क सिटी के रूप में प्रसिद्ध बनाती है। सूरत की गलियों में जरी और कॉटन के लघु उद्योगों से शुरू हुआ यह सफर आज आधुनिक तकनीक और कुशल उद्योगपतियों के कारण वैश्विक स्तर तक पहुंच चुका है। सूरत में टेक्सटाइल उद्योग की नींव 19वीं सदी में पड़ी, जहां 1866 से 1881 के बीच मिलों और जिनिंग फैक्ट्रियों की शुरुआत हुई। 1925 में टेक्सटाइल एक्सेसरीज़ के पहले कारखाने के बाद आज यह शहर 240 विशाल मार्केट्स और 70 हजार से अधिक व्यापारियों के विशाल नेटवर्क में बदल चुका है। जो उद्योग कभी छोटे स्तर पर शुरू हुआ था, वह आज रु. 1.5 लाख करोड़ का वार्षिक टर्नओवर तक पहुँच चुके हैं। वर्तमान में यह क्षेत्र लगभग 18 से 20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार प्रदान कर रहा है। सूरत और दक्षिण गुजरात का टेक्सटाइल उद्योग राज्य के जीडीपी में 25 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है। इसलिए दक्षिण गुजरात के टेक्सटाइल उद्योग को गुजरात के औद्योगिक विकास का इंजन कह सकते हैं। विश्व के कुल कपड़ा उत्पादन में 30 प्रतिशत और मैन-मेड फाइबर क्षेत्र में भारत के 65 प्रतिशत उत्पादन में अकेले सूरत का योगदान है। सूरत में सक्रिय 600 से अधिक प्रोसेस हाउस और लाखों पावरलूम्स के कारण यह शहर साड़ियों से लेकर देश के तिरंगे और हाई-एंड फैशन गारमेंट्स का प्रमुख केंद्र बन चुका है। सूरत के टेक्सटाइल उद्योग की व्यापकता इसकी मजबूत सप्लाई चेन और आधुनिक उत्पादन क्षमता में निहित है। यहां की मार्केट्स से 500 से अधिक ट्रांसपोर्टर्स द्वारा प्रतिदिन लाखों पार्सल सड़क, रेल और एयर कार्गो के माध्यम से विश्वभर में भेजे जाते हैं। स्पिनिंग से लेकर निटिंग तक की वैल्यू चेन में गुजरात और सूरत आज 90 प्रतिशत एमएमएफ (मैन-मेड फाइबर) कपड़े का उत्पादन करते हैं। सूरत का निटेड फैब्रिक वैश्विक मंच पर चमक रहा है। अमेरिका, इज़राइल और न्यूज़ीलैंड जैसे विकसित देश सूरत के निटेड फैब्रिक (टेक्निकल टेक्सटाइल्स) के प्रशंसक हैं। इसके अलावा सूरत में निर्मित स्पोर्ट्स जर्सी की ओलंपिक और आईपीएल जैसी वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं में भी भारी मांग रहती है। बुलेट ट्रेन, कोस्टल रोड और नवसारी के पीएम मित्र पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स सहित तकनीकी उन्नयन के लिए मिलने वाली सहायता टेक्सटाइल उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। आगामी 1 और 2 मई को सूरत में आयोजित ‘रीजनल वाइब्रेंट गुजरात समिट’ से सूरत के टेक्सटाइल सेक्टर में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित होगा, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सीधा नेटवर्किंग बढ़ेगा और नवीनतम तकनीकों के आदान-प्रदान से स्थानीय उत्पादक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और अधिक सशक्त बनेंगे, जिससे सूरत की विश्व के अग्रणी टेक्सटाइल हब के रूप में पहचान और मजबूत होगी। इस प्रकार, ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास का संगम जहां हुआ है, ऐसे 16वीं सदी के अग्रणी व्यापारी केंद्र और समृद्ध बंदरगाह सूरत ने अब सिल्क सिटी के रूप में वैश्विक पहचान प्राप्त कर ली है। टेक्सटाइल पॉलिसी के तहत सूरत के उद्योगों को सब्सिडी का प्रोत्साहन गुजरात टेक्सटाइल पॉलिसी-2019 के अंतर्गत सूरत जिले के उद्योगों को अभूतपूर्व गति मिली है, जिसके तहत अब तक कुल रु. 2325.87 करोड़ की सब्सिडी दी जा चुकी है। इस पॉलिसी के तहत नए और विस्तार करने वाले इकाइयों को 6 प्रतिशत तक ब्याज सहायता, वीविंग और निटिंग इकाइयों को बिजली बिल में प्रति यूनिट रु. 2 से रु. 3 की राहत तथा टेक्निकल टेक्सटाइल के लिए पूंजी निवेश सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, टेक्सटाइल पार्क्स के इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण के लिए सीईपीटी प्लांट्स स्थापित करने हेतु बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता दी गई है, जिससे सूरत का टेक्सटाइल उद्योग अधिक आधुनिक, प्रदूषण मुक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन गया है। गुजरात के टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाने के लिए गुजरात सरकार का मास्टरप्लान राज्य के टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नई टेक्सटाइल पॉलिसी-2024 लागू की गई है। इस पॉलिसी के तहत नए इकाइयों को 10 से 35 प्रतिशत तक की कैपिटल सब्सिडी प्रदान की जा रही है तथा वैल्यू एडिशन चेन के माध्यम से अंतिम छोर के गांवों तक रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। यूरोप के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) और अमेरिका में टैरिफ में कमी से सूरत के गारमेंट एक्सपोर्ट के लिए नए वैश्विक बाजार खुले हैं। सतीश/27 अप्रैल