ज़रा हटके
28-Apr-2026
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2014 की तुलना में कई गुना अधिक बड़ा रक्षा निर्यात बाजार मॉस्को,(ईएमएस)। दुनिया के हथियार बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को लेकर रूस में काफी चर्चा हो रही है। रूसी पत्रकार ने अपने पोस्ट में दावा किया है कि हथियारों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत अब तेजी से उभरता हुआ खिलाड़ी बन चुका है और इससे रूस के पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। उनके अनुसार, यह स्थिति मॉस्को के लिए रणनीतिक चुनौती बनती जा रही है, क्योंकि कई पुराने साझेदार देश अब भारत की ओर देख रहे हैं। रुसी पत्रकार के मुताबिक, 2025 में भारत का रक्षा निर्यात करीब 4 अरब डॉलर तक पहुंचा है, जो 2014 की तुलना में कई गुना अधिक है। इस वृद्धि ने भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ताओं की सूची में एक मजबूत स्थान दिलाया है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस भारत का प्रमुख ग्राहक बनकर उभरा है, जबकि आर्मेनिया और वियतनाम जैसे देश भी भारतीय हथियारों की खरीद बढ़ा रहे हैं। आर्मेनिया का उदाहरण खासतौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले यह देश लगभग पूरी तरह रूसी हथियारों पर निर्भर था, लेकिन हाल के वर्षों में आर्मेनिया ने भारत से रक्षा उपकरण खरीदना शुरू किया है। इसमें पिनाका मल्टी-रॉकेट लांच सिस्टम, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और एटीएजीएस हॉवित्जर जैसे हथियार शामिल हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2022–2024 के बीच आर्मेनिया के हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे वह उसका प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की सफलता के पीछे उसकी बढ़ती डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और निर्यात नीति में सुधार है। भारत अब केवल आयातक देश नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे एक विश्वसनीय रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित हो रहा है। सिर्री जैसे अंतरराष्ट्रीय रक्षा अनुसंधान संस्थानों के आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि भारत ने पिछले एक दशक में अपने रक्षा निर्यात को शून्य से शुरू कर तेज गति से बढ़ाया है। वहीं फिलीपींस जैसे देशों द्वारा भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदना भी बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह मिसाइल मूल रूप से भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित हुई थी, इसलिए इसमें रूस की तकनीकी भागीदारी भी मानी जाती है। इसके अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया और कुछ खाड़ी देश भी भारतीय हथियारों में रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और भारत के कुल आयात में उसका हिस्सा लगभग 36–40 प्रतिशत के बीच है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि भारत अब सिर्फ खरीददार नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी निर्यातक बनकर उभर रहा है। यही कारण है कि वैश्विक डिफेंस बाजार में शक्ति संतुलन धीरे-धीरे बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। आशीष/ईएमएस 28 अप्रैल 2026