राज्य
28-Apr-2026


- प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा, एक अन्य मामला खारिज किया भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भूजल प्रबंधन और रिचार्ज से जुड़े मुद्दे पर नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) की भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्र पीठ ने गंभीर रुख अपनाया है। अधिकरण ने मामले को महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दा मानते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। एनजीटी ने कहा कि सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। वे छह सप्ताह के भीतर ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से अपना जवाब प्रस्तुत करें। राजेंद्र तिवारी बनाम भारत संघ एवं अन्य (ओए संख्या 98/2026) मामले की सुनवाई 24 अप्रैल 2026 को हुई। इसमें न्यायमूर्ति शियो कुमार सिं और विशेषज्ञ सदस्य सूधीर कुमार चतुर्वेदीकी पीठ ने मामले को गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा माना। याचिका में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की 24 सितंबर 2020 की अधिसूचना के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई है। साथ ही वैज्ञानिक तरीकों से भूजल पुनर्भरण और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि को प्रभावित क्षेत्रों में उपयोग करने का मुद्दा उठाया गया है। भूजल प्रबंधन किए गए कामों की रिपोर्ट पेश करें अधिकरण ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे भूजल प्रबंधन से जुड़े उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट पेश करें। साथ ही आवेदक को सभी पक्षों को आवेदन की प्रति उपलब्ध कराकर शपथपत्र दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई 2026 को होगी। एक अन्य मामले में एनजीटी ने अपील खारिज की एक अन्य मामले में एनजीटी की नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ ने दायर अपील खारिज कर दी। मामला जंगल की जमीन को एक निजी कंपनी को देने की अनुमति को चुनौती देने से जुड़ा है। अपीलकर्ता ने केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और मध्य प्रदेश सरकार के उस फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें कंपनी को फॉरेस्ट डायवर्जन की मंजूरी दी गई थी। लेकिन अपील 259 दिन बाद दायर की गई। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार अधिकतम 90 दिन के भीतर ही अपील की जा सकती है, इसलिए देरी माफ नहीं की जा सकती और अपील खारिज कर दी गई। विनोद / 28 अप्रैल 26