राष्ट्रीय
28-Apr-2026
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-अमेरिका-चीन दोनों ही युवा पीएम शाह पर कूटनीतिक डोरे डालने की कोशिश में नई दिल्ली,(ईएमएस)। 30 अप्रैल को सर्जियो गोर काठमांडू पहुंच आ रहे हैं। इसके करीब दो हफ्ते बाद ही भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री के भी नेपाल यात्रा की योजना है। नेपाल में बालेन शाह की सरकार बनने के बाद से किसी बड़े भारतीय अधिकारी का यह पहला आधिकारिक नेपाल दौरा होगा। चीन तो पहले ही अपने कई दूतों को वहां भेज चुका है। सवाल है कि आखिर नेपाल में चल क्या रहा है? नेपाल में जब से पीएम बालेन शाह ने कमान संभाली है, अमेरिका और चीन दोनों ने ही युवा पीएम पर कूटनीतिक डोरे डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। ऐसे में भारत के विदेश सचिव के काठमांडू जाने की अहमियत और बढ़ गई है। इस दौरान विदेश सचिव नेपाली नीउम बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक न्योता भी देने वाले हैं। इसी महीने की शुरुआत में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की मॉरीशस में विदेश मंत्री एस जयशंकर से बातचीत हो चुकी है। दोनों नेता नौंवें हिंद महासागर कॉन्फ्रेंस के लिए वहां पहुंचे थे, जहां नेपाल की प्राथमिकता के हिसाब से वहां चल रहे प्रोजेक्ट को पूरा किए जाने को लेकर भी दोनों में बातचीत हुई थी। भारत और नेपाल सांस्कृतिक और सभ्यतागत तौर पर एक-दूसरे से आदिकाल से अटूट डोर से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों का जन-जन रोटी-बेटी वाले संबंधों का जिक्र यूं ही नहीं करता, लेकिन अमेरिका और चीन जिस तरह से नेपाल की नई सरकार पर प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहे हैं, वह भारत के सामरिक-सांस्कृतिक हित के लिए भी बहुत अहम है। नेपाल भारत और चीन के बीच एक बफर स्टेट की भूमिका में है। भारत की मौजूदा नेबरहूड फर्स्ट पॉलिसी के तहत यूं भी नेपाल हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक मई 2014 के बाद से दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच 17 बार द्वपक्षीय मुद्दों पर चर्चाएं हो चुकी हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को ट्रंप ने दक्षिण और मध्य एशिया का विशेष दूत भी बनाया है। इसी रोल में वह 30 अप्रैल को काठमांडू जाने वाले हैं। हालांकि, नेपाली पीएम बालेन शाह से उनकी मुलाकात अभी तय नहीं हुई है। सर्जियो गोर से पहले अमेरिका के सहायक विदेश सचिव समीर पॉल कपूर की नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल और वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले से मुलाकात हो चुकी है। चीन की तरफ से चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग की उप महानिदेशक काओ जिंग नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय और संयुक्त सचिव भ्रिगु धुंगाना से मुलाकात कर चुकी हैं। भारत और चीन के बीच होने की वजह से नेपाल का अपना एक रणनीतिक महत्त्व है। अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लगातार अपना प्रभाव बढ़ाने में जुटा है। वहीं चीन अपने दक्षिणी हिस्से को सुरक्षित रखना चाहता है, ताकि तिब्बत के आसपास बाहरी प्रभाव बढ़ने न पाए। चीन वहां अपने बेल्ट एंड रोड इनिएशिटिव से जुड़े प्रोजेक्ट को भी बढ़ाना चाहता है, जिसकी वजह से वह केपी शर्मा ओली की तरह की वामपंथी सरकारों को परोक्ष तौर पर बहकाता आया है, जबकि अमेरिकी मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन कॉम्पैक्ट जैसे विकास योजनाओं पर काम करना चाहता है। दोनों ही देश निवेश और सहायता देकर नेपाल में लंबे समय के लिए अपना दबदबा कायम करना चाहते हैं। यही वजह है कि तिब्बती शरणार्थियों के पहचान पत्र के मुद्दे पर अमेरिकी बयान से चीन तिलमिला गया और उसने चाइनीज दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जोउ पैन को भ्रिगु धुंगाना के पास शिकायत लेकर भेज दिया। सिराज/ईएमएस 28अप्रैल26