टीएमसी के गढ़ में आयोग ने उन्हें दी तैनाती कोलकत्ता (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा चर्चा में आ गए है। चुनाव आयोग द्वारा उन्हें दक्षिण 24 परगना जिले में पर्यवेक्षक के रूप में तैनात करने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज है। उनकी तैनाती को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिल रहे हैं। दरअसल आईपीएस अधिकारी शर्मा अपनी सख्त पुलिसिंग, तेज कार्रवाई और “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” की छवि के लिए मशहूर हैं। उन्हें उनके समर्थक और मीडिया में अक्सर “सिंघम” जैसे उपनामों से पुकारा जाता है। मूल रूप से पंजाब के लुधियाना से आने वाले शर्मा ने चिकित्सा के क्षेत्र में डेंटिस्ट के रूप में करियर की शुरुआत की थी, लेकिन बाद में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया। अपने पुलिस करियर के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे नोएडा, शामली, रामपुर और जौनपुर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में वे प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। उनके कार्यकाल के दौरान कई अपराध विरोधी अभियानों और मुठभेड़ों में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है। उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने कानून-व्यवस्था सुधारने में कड़े और प्रभावी कदम उठाए हैं। हालांकि, उनका करियर विवादों से भी जुड़ा रहा है। कुछ मामलों में उन पर कथित फर्जी मुठभेड़ों और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने उनकी कार्यशैली पर कई बार सवाल उठाए हैं। इन आरोपों को लेकर अलग-अलग स्तर पर राजनीतिक बहस भी हुई है। बंगाल में उनकी तैनाती खास तौर पर इसलिए संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि दक्षिण 24 परगना क्षेत्र को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और प्रभावशाली इलाका माना जाता है। यह क्षेत्र सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए मजबूत आधार रहा है, जहां ममता और अभिषेक बनर्जी का प्रभाव माना जाता है। तैनाती के बाद अजय शर्मा ने क्षेत्र का दौरा कर सुरक्षा और चुनावी तैयारियों का जायजा लिया और कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए। इसी बीच उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वे कथित तौर पर सख्त चेतावनी देते नजर आए, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। आशीष दुबे / 28 अप्रैल 2026