राष्ट्रीय
28-Apr-2026


* 1.15 लाख मीट्रिक टन उत्पादन और रु. 230 करोड़ मूल्य के साथ दक्षिण गुजरात बना अग्रणी क्षेत्र गांधीनगर (ईएमएस)| दक्षिण गुजरात आज चीकू उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है और अब वैश्विक बाजारों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। गुजरात के कुल चीकू उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत योगदान देने वाला यह क्षेत्र राज्य की बागायती प्रगति का प्रमुख आधार बन गया है। वर्ष 2024-25 के दौरान इस क्षेत्र में 1.15 लाख मीट्रिक टन से अधिक चीकू का उत्पादन हुआ, जिसका मूल्य रु. 230 करोड़ से अधिक आंका गया। यह राज्य के कुल उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत है, जो दर्शाता है कि गुजरात में उत्पादित हर दूसरा चीकू इसी क्षेत्र से आता है। 1 और 2 मई को सूरत की ऑरो यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाली वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) इस उपलब्धि को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के साथ कृषि क्षेत्र में नई निवेश संभावनाओं को भी गति प्रदान करेगी। राज्य सरकार के बागवानी निदेशक के अनुसार, गुजरात देश में चीकू उत्पादन के मामले में दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य में 25,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में चीकू की खेती की गई, जिससे कुल उत्पादन 2.40 लाख मीट्रिक टन से अधिक दर्ज हुआ। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर गुजरात की मजबूत पकड़ और बढ़ती कृषि संभावनाओं को रेखांकित करता है। * गुजरात सरकार की ओर से चीकू के किसानों को प्रति हेक्टेयर रु. 22,000 तक की आर्थिक सहायता किसानों की आय बढ़ाने और बागायती उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए गुजरात सरकार ने एकीकृत बागवानी विकास कार्यक्रम के तहत कई अहम पहलें लागू की हैं। चीकू की खेती को बढ़ावा देने के लिए रोपण सामग्री पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है, वहीं चीकू उत्पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर रु. 22,000 तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह योजनाएं न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायक साबित हो रही हैं, बल्कि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त कर रही हैं। * कोल्ड चेन और एग्री-लॉजिस्टिक्स में निवेश की संभावनाएं बढ़ीं ताजे और प्रोसेस्ड फलों की बढ़ती मांग को देखते हुए गुजरात कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और एग्री-लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत स्थिति में है। वैल्यू एडिशन, वेयरहाउसिंग, रिपनिंग सुविधाएं और फार्म-टू-मार्केट कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं, जो बागायती उत्पादों के बेहतर विपणन और निर्यात को गति दे सकती हैं। दक्षिण गुजरात में चीकू खेती की सफलता राज्य की कृषि विविधीकरण और किसान सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। चीकू उत्पादन में हासिल यह उपलब्धि केवल कृषि विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और नए निवेश अवसर सृजित करने का भी सशक्त उदाहरण है, जो गुजरात को बागायती क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में आगे बढ़ा रहा है। * आगामी वीजीआरसी में बागायती क्षेत्र को मिलेगा बड़ा मंच, निवेश और वैल्यू एडिशन के खुलेंगे नए अवसर आगामी वीजीआरसी (दक्षिण गुजरात) कॉन्फ्रेंस बागायती क्षेत्र के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरेगा। चीकू उत्पादन में प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात के माध्यम से वैल्यू एडिशन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सम्मेलन के दौरान निवेशकों, उद्यमियों, निर्यातकों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद के जरिए कृषि वैल्यू चेन को मजबूत करने और नए व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रहेगा। सतीश/28 अप्रैल