अहमदाबाद (ईएमएस)| अहमदाबाद में एक चौंकाने वाला राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। अहमदाबाद के खाडिया वार्ड में भाजपा का वर्षों पुराना मजबूत गढ़ इस बार पूरी तरह ढह गया, जबकि कांग्रेस ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सभी सीटों पर कब्जा कर लिया। अहमदाबाद नगर निगम चुनावों में खाडिया वार्ड के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। 1972 के बाद यानी लगभग 54 वर्षों में पहली बार खाडिया में कांग्रेस ने “क्लीन स्वीप” किया है। भाजपा की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब इस इलाके में पार्टी के सभी उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। खाडिया, जो अहमदाबाद का ऐतिहासिक और पॉल-आधारित इलाका माना जाता है, वहां लगातार बढ़ते कॉमर्शियल निर्माणों को लेकर स्थानीय लोगों में भारी असंतोष था। हेरिटेज मकानों और पारंपरिक पॉल संस्कृति के संरक्षण को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा था। इसी मुद्दे पर “खाडिया बचाओ आंदोलन” भी सक्रिय था, जिसके एक प्रमुख नेता ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ा। भाजपा की ओर से पूर्व डिप्टी मेयर जैसे बड़े नेताओं ने मतदाताओं को मनाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों के बड़े होने और स्थानीय समस्याओं के कारण कई मूल निवासी यहां से स्थानांतरित हो गए। इसके साथ ही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद लगभग 25,000 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने को भी चुनावी हार का एक अहम कारण माना जा रहा है। भाजपा ने जहां विकास और शहरी विस्तार के मुद्दे पर वोट मांगे, वहीं स्थानीय मतदाताओं के लिए हेरिटेज संरक्षण और अनियंत्रित निर्माण मुख्य मुद्दा बने रहे। इसी मुद्दे को कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मजबूती से उठाया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ खाडिया की पूरी कांग्रेस पैनल विजयी रही। विजयी उम्मीदवारों में मीना नायक, बीरजुबेन ठक्कर, ध्रुव कलापी और मोहम्मद इल्यास पठान शामिल हैं| इस परिणाम को खाडिया की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसने वर्षों से चले आ रहे राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। - 28 अप्रैल