- नहीं आ पाएंगी अभी इन्दौर इन्दौर (ईएमएस) मेघालय के सोहरा (चेरापूंजी) में पिछले साल हुए बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में शिलांग की एक स्थानीय अदालत ने मामले की मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी, सोनम रघुवंशी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। करीब 11 महीनों से न्यायिक हिरासत में बंद सोनम को यह राहत उनकी चौथी जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान मिली। क्या था पूरा मामला - मई 2025 में इंदौर निवासी बिजनेसमैन राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे। वहां से राजा के लापता होने की खबर आई और बाद में 2 जून 2025 को सोहरा के पास वेई सावदोंग फॉल्स (Wei Sawdong Falls) की एक गहरी खाई से उनका शव बरामद हुआ। पुलिस और एसआईटी (SIT) की जांच में खुलासा हुआ था कि यह महज हादसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी। पुलिस का आरोप है कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी और इसके लिए तीन कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को सुपारी दी गई थी। उसके बाद सोनम रघुवंशी और उसकी साथ इस हत्याकांड में सहयोगी राज कुशवाह तथा अन्य को शिलांग पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था तभी से वह जेल में थी। हालांकि अदालत ने सोनम को जमानत दे दी है, लेकिन उन पर कड़ी शर्तें लागू की गई हैं ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें इसके चलते • शहर छोड़ने पर रोक: सोनम को बिना कोर्ट की अनुमति के शिलांग से बाहर जाने की अनुमति नहीं है। • दैनिक उपस्थिति: उन्हें रोजाना स्थानीय पुलिस स्टेशन जाकर अपनी हाजिरी दर्ज करानी होगी। • साक्ष्यों की सुरक्षा: वे किसी भी गवाह या सबूत से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगी। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपी (पूर्वी खासी हिल्स) ने कहा कि पुलिस ने अपना काम ईमानदारी से किया और समय पर चार्जशीट दाखिल की थी। जमानत मिलना अदालत का विवेकपूर्ण अधिकार है। वहीं मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने इस फैसले पर गहरा असंतोष जताया है। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा, यह हमारे लिए न्याय की लड़ाई में एक बड़ा झटका है। हम इस जमानत आदेश को चुनौती देने के लिए जल्द ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। बता दें कि इस मामले में आरोपी बनाए गए, लोकेंद्र सिंह तोमर, बलबीर अहिरवार और शिलोम जेम्स पहले ही जमानत पर बाहर हैं। वहीं, मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा राज कुशवाहा फिलहाल जेल में ही है। ज्ञात हो कि इस बहुचर्चित हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान खींचा था क्योंकि यह एक विश्वासघात और जघन्य अपराध की दास्तां थी। अब देखना यह होगा कि ट्रायल के दौरान कोर्ट इस मामले में क्या अंतिम फैसला सुनाती है। - 28 अप्रैल 2026