रिपोर्ट ने चेताया, समाधान नहीं निकाले तो गर्मी से होने वाली मौत हो जाएंगी आम लंदन (ईएमएस)। आज दुनिया के कई शहरों में गर्मी साइलेंट किलर की तरह फैल रही है। खासकर ग्लोबल साउथ यानी गरीब देशों के शहरों में यह समस्या बहुत भयानक रुप ले रही है। तेजी से बढ़ते शहर, कम संसाधन और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्मी अब रोजमर्रा की जिंदगी को तबाह कर रही है। लोग काम नहीं कर पा रहे हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। बीमार लोग अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं। गर्मी से बिजली की मांग इतनी बढ़ जाती है कि पूरे सिस्टम पर बोझ पड़ता है। प्रदूषण भी बढ़ता है। शहरों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट की वजह से तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो जाता है। यह गर्मी अब सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि मौत, बेरोजगारी और भुखमरी का कारण बन रही है। विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में डरावने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 2050 तक शहरों में रहने वाले गरीब लोगों की संख्या जो खतरनाक गर्मी झेल रही होगी, वह 700 फीसदी बढ़ जाएगी। इसका मतलब है कि आज जितने गरीब गर्मी से प्रभावित हैं, उससे सात गुना ज्यादा लोग 2050 में इस आग में जलेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के शहरों पर मंडरा रहा है। यहां गरीब परिवार, बाहर काम करने वाले मजदूर, बुजुर्ग और बच्चे सबसे पहले शिकार होंगे। अगर अभी कुछ नहीं किया गया तो हीटवेव और ज्यादा तेज और लंबी होंगी। लोग मरेंगे, परिवार बिखरेंगे और पूरा शहर ठप हो जाएगा। गर्मी से काम-धंधा ठप हो जाएगा। स्कूल बंद हो जाएंगे। अस्पतालों में मरीजों की लाइन लग जाएगी। गर्मी से बिजली की मांग इतनी बढ़ेगी कि बिजली संकट गहरा जाएगा। गरीबी और असमानता बढ़ेगी। लोग शहर छोड़कर भागने लगेंगे। आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन बढ़ेगा। अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। विश्व बैंक का कहना है कि गर्मी अब सिर्फ मौसमी परेशानी नहीं है। यह शहरों की पूरी व्यवस्था को चूर-चूर कर देगी। अगर शहर अभी तैयार नहीं हुए तो लाखों लोग बेघर हो जाएंगे, भूखे मरेंगे और गर्मी की वजह से मौतें आम हो जाएंगी। इस डरावनी स्थिति से निपटने के लिए विश्व बैंक ने यूएन हबीटेट और यूएनईपी के साथ मिलकर एक खास हैंडबुक बनाई है। नाम है हैंडबुक ऑन अर्बन हेट मैनेजमेंट इन द ग्लोबल साउथ। यह हैंडबुक तीन हिस्सों में है– नीति-निर्माताओं के लिए सरल सारांश, तकनीकी मैनुअल और समाधान कैटलॉग। इसमें शहरों को बताया गया है कि गर्मी का खतरा कैसे मापें। कैसे तैयार रहें। क्या-क्या समाधान अपनाएं। इसमें हरे-भरे बगीचे, छायादार इमारतें, पैसिव कूलिंग यानी बिना बिजली के ठंडक देने वाले तरीके और सस्टेनेबल कूलिंग सिस्टम जैसे आसान और सस्ते उपाय बताए गए हैं। हैंडबुक साफ कहती है कि शहरों को अब गर्मी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसे मौसमी तकलीफ मानकर नजरअंदाज करने से पूरा शहर बर्बाद हो सकता है। ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, छतों पर बगीचे, बेहतर शहर नियोजन और गरीबों तक सस्ती कूलिंग पहुंचाना जरूरी है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि गर्मी अब रोजमर्रा की जिंदगी को बदल रही है। अगर शहर अभी सक्रिय नहीं हुए तो 2050 तक गर्मी लाखों गरीबों की जिंदगी छीन लेगी। विश्व बैंक की यह हैंडबुक शहरों के लिए अंतिम चेतावनी है। अब समय है कि सरकारें, शहर प्रशासन और लोग मिलकर इस डरावने संकट से लड़ें वरना आने वाले सालों में शहर आग के समंदर बन जाएंगे जहां सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। सिराज/ईएमएस 29 अप्रैल 2026