वॉशिंगटन(ईएमएस)। ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी सत्ता के गलियारों में एक गंभीर आंतरिक कलह उभरकर सामने आई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध की वास्तविक स्थिति को लेकर खुद के ही बुने झूठ के जाल में फंस गया है? इस विवाद के केंद्र में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस हैं, जिन्हें इस युद्ध की रणनीतिक दिशा और संसाधनों की कमी को लेकर गहरा डर सता रहा है। खबर है कि वेंस ने बंद कमरे की बैठकों में पेंटागन द्वारा साझा की जा रही जानकारियों पर संदेह जताया है। उनका मुख्य सवाल यह है कि क्या रक्षा मंत्रालय अमेरिकी मिसाइल भंडार में आ रही भारी कमी की पूरी और सच्ची जानकारी सरकार को दे रहा है या नहीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वेंस ने इस मुद्दे पर सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी चर्चा की है। उनकी चिंता का मुख्य कारण हथियारों का तेजी से घटता जखीरा है। सैन्य आकलनों से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका ने इस युद्ध में अपने मिसाइल इंटरसेप्टर और लंबी दूरी तक मार करने वाले कुछ महत्वपूर्ण हथियारों का आधे से ज्यादा भंडार पहले ही इस्तेमाल कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही, तो अमेरिका की वैश्विक सैन्य साख खतरे में पड़ सकती है। यदि भविष्य में ताइवान, दक्षिण कोरिया या यूरोप में कोई नया मोर्चा खुलता है, तो अमेरिका के पास जवाबी कार्रवाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचेंगे। एक तरफ रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक तौर पर यह दावा कर रहे हैं कि अमेरिकी सैन्य भंडार पूरी तरह मजबूत है और ईरान को अपूरणीय क्षति हुई है, वहीं दूसरी ओर खुफिया रिपोर्टों ने इन दावों की हवा निकाल दी है। खुफिया विभाग के मुताबिक, लगातार हमलों के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता और नौसैनिक ताकत का बड़ा हिस्सा अब भी सुरक्षित है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग पर ईरान का प्रभाव कम नहीं हुआ है। युद्धविराम की कोशिशों के बीच ईरान ने अपने मिसाइल ढांचे को फिर से सक्रिय करना शुरू कर दिया है, जिससे यह संघर्ष लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है। राष्ट्रपति ट्रंप की टीम में इस मुद्दे पर वैचारिक मतभेद साफ दिखने लगे हैं। जहां रक्षा मंत्री आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं जेडी वेंस जैसे नेता लंबे विदेशी युद्धों के दुष्परिणामों को लेकर सतर्क हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि अमेरिका-ईरान युद्ध अब केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वॉशिंगटन के भीतर पारदर्शिता, रणनीति और भविष्य की रक्षा तैयारियों को लेकर एक बड़ी राजनीतिक और सैन्य बहस का रूप ले चुका है। शुरुआत में इस संघर्ष के जल्दी खत्म होने का अनुमान था, लेकिन अब यह एक अनिश्चित और लंबी जंग में तब्दील होता दिख रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/29अप्रैल2026