अंतर्राष्ट्रीय
29-Apr-2026
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वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम के बावजूद दोनों देशों के संबंधों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अब यह टकराव सीधे सैन्य संघर्ष से हटकर तीखी बयानबाज़ी और रणनीतिक चेतावनियों के रूप में सामने आ रहा है, जिससे पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका गहरा गई है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने भी आक्रामक रुख दिखाकर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। ईरानी उपराष्ट्रपति इस्माइल साघाव एस फाहानी ने कहा कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगियों ने ईरान के तेल संसाधनों या बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया, तब उसका जवाब कई गुना अधिक ताकत से दिया जाएगा। उनका बयान “एक तेल कुआं =चार तेल कुएं” इस बात का संकेत है कि ईरान अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक जवाबी रणनीति पर काम कर रहा है। इसके पहले ट्रंप ने भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान युद्धविराम का पालन नहीं करता, तब अमेरिका उसकी तेल पाइपलाइनों को टारगेट कर सकता है। विशेषज्ञों ने बयान को अप्रत्यक्ष सैन्य धमकी के रूप में देखा है। कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति ठहरी हुई है। ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी सवाल उठाए हैं। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि पाकिस्तान निष्पक्ष भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है और वह अक्सर अमेरिकी हितों के अनुरूप कार्य करता है। इससे स्पष्ट है कि कूटनीतिक प्रयासों में भी अविश्वास बढ़ता जा रहा है। इसी बीच क्षेत्रीय तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। इजराइल और हिजबुल्ला के बीच भी संघर्ष तेज होता दिख रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर युद्धविराम उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में अपने एक सैनिक की मौत की पुष्टि की है, जबकि हिजबुल्ला का कहना है कि उसकी कार्रवाई इजराइल के हमलों का जवाब थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की मिसाइल क्षमता अब एक बड़ा रणनीतिक कारक बन चुकी है। दावा किया जा रहा है कि ईरान जिस तेजी से बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहा है, उसके मुकाबले इजराइल अपनी इंटरसेप्टर मिसाइलों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पा रहा। कुछ आकलनों के अनुसार, जहां इजराइल एक इंटरसेप्टर बनाता है, वहीं ईरान लगभग दस मिसाइलें तैयार कर लेता है। इससे इजराइल की रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है। कुल मिलाकर, भले ही कागज़ों पर युद्धविराम लागू हो, लेकिन वास्तविकता में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी देश अमेरिका का समर्थन करेगा, उस वह विरोधी मानेगा। ऐसा होने पर पूरे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका फिर से गहराती नजर आ रही है। आशीष/ईएमएस 29 अप्रैल 2026