मुंबई, (ईएमएस)। विशेष पॉक्सो अदालत ने 28 वर्षीय युवक को चार साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह घटना कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान वर्ष 2020 में आरोपी के पड़ोस में हुई थी। विशेष लोक अभियोजक गीता मलंकर ने अदालत में बच्ची और उसकी मां को गवाह के रूप में पेश किया। पीड़िता की मां ने बयान में बताया कि वह अपनी बड़ी बेटी को पढ़ा रही थीं, तभी छोटी बच्ची बारिश देखने के लिए कॉमन पैसेज में चली गई। कुछ देर बाद जब वह लौटी तो दर्द और जलन की शिकायत करने लगी। पूछने पर बच्ची ने बताया कि पड़ोसी ने उसके साथ गलत हरकत की। सूचना मिलने पर बच्ची के पिता, जो एक रेस्टोरेंट में रसोइए का काम करते हैं, तुरंत घर लौटे और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि आरोपी को निजी विवाद के कारण झूठा फंसाया गया है और बच्ची को किसी संक्रमण की समस्या थी, यौन उत्पीड़न नहीं हुआ था। हालांकि अदालत ने कहा कि निजी विवाद या पहले से बीमारी होने के कोई सबूत नहीं मिले। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिल्पा एस. तोडकर ने आरोपी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और आदेश दिया कि यह राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाए। संजय/संतोष झा- २९ अप्रैल/२०२६/ईएमएस