राज्य
29-Apr-2026


रांची(ईएमएस)।झारखंड हाइकोर्ट ने राजधानी सहित पूरे राज्य में दुकानों में खुलेआम कटे हुए बकरे व मुर्गे की बिक्री के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस एमएस सोनक व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के जवाब को देखा।जवाब को संतोषजनक नहीं पाया। खंडपीठ ने इस बात पर नाराजगी जतायी की मामले में अब तक सिर्फ पत्र लिख कर एक-दूसरे पर फेंका फेंकी की जा रही है।नियमावली बनाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है।खंडपीठ ने स्वास्थ्य के अपर मुख्य सचिव को मामले को देखने का निर्देश दिया तथा दो माह में मॉडल नियमावली बना कर पेश करने का निर्देश दिया।खंडपीठ ने पूछा कि फूड सेफ्टी रेगुलेशन-2011 का पालन करने के लिए क्या कदम उठाया गया है।मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 22 जुलाई की तिथि निर्धारित की।इससे पूर्व राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दायर कर मामले में की गयी कार्रवाई की जानकारी दी गयी।सरकार की ओर से अधिवक्ता योगेश मोदी ने पैरवी की. वहीं प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शुभम कटारुका ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि कोर्ट के निर्देश के बावजूद अब तक मॉडल नियमावली नहीं बनायी गयी है।अभी भी जानवर काट कर खुले में मांस बेचा जाता है।कहा गया था कि जब तक नियमावली नहीं बनती है, तब तक फूड सेफ्टी रेगुलेशन-2011 का सख्ती से पालन कराया जाये, लेकिन उसका भी पालन नहीं कराया जा रहा है। 19 दिसंबर 2025 की सुनवाई में कोर्ट के आदेश के आलोक में स्वास्थ्य के अपर मुख्य सचिव, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव व रांची नगर निगम प्रशासक सशरीर उपस्थित हुए थे। उल्लेखनीय है कि प्रार्थी श्यामानंद पांडेय ने जनहित याचिका दायर की है।याचिका में कहा गया है कि रांची सहित राज्य में खुले में कटे हुए बकरा व चिकन की बिक्री के लिए उसका प्रदर्शन करते हैं।यह एफआइसीसीआइ के रूल एंड रेगुलेशन के खिलाफ है।साथ ही सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के विपरीत भी है। एकल पीठ ने 19 जुलाई 2023 को खुले में मांस की बिक्री तथा स्लॉटर हाउस के संचालन पर नियम बनाने का आदेश दिया था। कर्मवीर सिंह/29अप्रैल/26