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30-Apr-2026


- ऊर्जा सुरक्षा, विनियमन में ढील और श्रमबल कौशल पर पांच आयामी रणनीति का सुझाव नई दिल्ली (ईएमएस)। वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा में भारत को पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर अल्पकालिक वृद्धि के पीछे भागने के बजाय मध्यम अवधि की राजकोषीय और बाह्य स्थिरता को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के नेतृत्व में तैयार इस रिपोर्ट में देश की वृहद आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और लंबे समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अल्पकालिक वृद्धि को बहाल करने के प्रयास बाहरी संतुलन, मुद्रास्फीति और मुद्रा को अस्थिर करके मध्यम से लंबी अवधि की वृद्धि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। मंत्रालय ने इस संकट से सबक लेते हुए पांच आयामी सुधार रणनीति अपनाने की सलाह दी है। इस रणनीति के तहत, भारत को ऊर्जा सुरक्षा और लचीलेपन को प्राथमिकता देनी चाहिए, बजाय आयात के लिए एक स्रोत पर निर्भरता को दूसरे से बदलने के। सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक जोर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और शहरी जीवन स्तर में सुधार लाएगा, हालांकि इसके लिए राज्यों के साथ आम सहमति की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट घरेलू स्तर पर विनियमन को कम करने पर भी जोर देती है, विशेषकर आयात और निर्यात की लागत घटाने वाले उपाय ऐसे समय में अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। कृषि और जल नीतियों में लंबे समय से लंबित सुधारों को लागू करने का यह आदर्श समय बताया गया है, जो कृषि उत्पादकता में सुधार पर केंद्रित हैं। सामान्य से कम मॉनसूनी बारिश को एक प्रमुख जोखिम बताया गया है। इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में भविष्य के तकनीकी बदलावों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रभाव से निपटने के लिए युवाओं में नए कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया है, ताकि घरेलू विनिर्माण और सेवाओं को बढ़ावा मिले और निर्यात के नए अवसर पैदा हों। इसमें कहा गया है कि रोजगार की चुनौती केवल आईटी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। सतीश मोरे/30अप्रैल ---