- ऊंची कीमतों के बीच निवेश मांग में 54 फीसदी की वृद्धि, आभूषण खरीदारी 19 फीसदी घटी नई दिल्ली (ईएमएस)। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में इस साल जनवरी-मार्च तिमाही में सोने की कुल मांग 10 प्रतिशत बढ़कर 151 टन हो गई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से निवेश मांग में मजबूत उछाल के कारण हुई है, जिसने आभूषणों की घटती खरीद की काफी हद तक भरपाई कर दी है। रिपोर्ट दर्शाती है कि भारतीय स्वर्ण बाजार में अब आभूषणों के बजाय निवेश की ओर झुकाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक तिमाही के दौरान सोने की छड़ों, सिक्कों और गोल्ड ईटीएफ के जरिए निवेश मांग में 54 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़कर 82 टन हो गई। इसकी मुख्य वजह सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतें रहीं, जिसने उपभोक्ताओं को निवेश के रूप में सोने की ओर आकर्षित किया। हालांकि, ऊंची कीमतों का असर आभूषण मांग पर नकारात्मक रहा, जिसमें सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 66 टन रह गई। कीमत के प्रति संवेदनशील उपभोक्ता वर्ग पर विशेष रूप से इस गिरावट का प्रभाव देखा गया। डब्ल्यूजीसी ने पूरे वर्ष के लिए सोने की मांग 650-750 टन के बीच रहने का अनुमान जताया है, जबकि पिछले साल यह 712 टन थी। मूल्य के लिहाज से इस तिमाही में सोने की मांग लगभग दोगुनी होकर 99,900 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 99 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। डब्ल्यूजीसी के एक मुख्य अधिकारी ने कहा कि भारत का सोना बाजार मात्रा के रुझान और मूल्य वृद्धि के बीच अंतर को दर्शाता है, जो रिकॉर्ड ऊंची कीमतों और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं से प्रभावित है। घरेलू सोने की कीमत इस तिमाही में सालाना आधार पर 81 प्रतिशत बढ़कर औसतन 1,51,108 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 83,375 रुपये थी। सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग 34 प्रतिशत बढ़कर 62 टन हो गई, जो 2013 के बाद पहली तिमाही का सबसे ऊंचा स्तर है। यह पारंपरिक रूप से आभूषण-प्रधान बाजार से एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। सतीश मोरे/30अप्रैल ---