बंगालियों की विश्वसनीयता, राज्य सरकार के कर्मचारियों की निष्पक्षता पर बवाल देश में पहली बार राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारी चुनाव आयोग के निशाने पर कोलकाता (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों की मतगणना को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय की चर्चा है। खबरों के अनुसार, इस बार मतगणना कार्य में राज्य सरकार के कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। इसके बजाय केंद्र सरकार के विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मतगणना के कार्य में तैनात किए जाने की योजना चुनाव आयोग की है। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग ने यह निर्णय मतगणना की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लेने जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है, चुनावों में राज्य प्रशासन की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैँ, जिसके बाद चुनाव आयोग वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस संबंध में अभी तक भारत निर्वाचन आयोग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है।यह निर्णय चुनाव आयोग के लिए चुनौती पूर्ण होगा। इतने बड़े पैमाने पर केंद्रीय कर्मचारियों की उपलब्धता और समन्वय एक चुनौती बन सकता है। इसके साथ ही राज्य की अस्मिता और राज्य के अधिकारियों कर्मचारियों की विश्वसनीयता को लेकर पहली बार देश में एक नया विवाद बनने की संभावना व्यक्त की जा रही है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर वैसे भी टीएमसी सहित सभी गैर भाजपाई दल चुनाव आयोग को निशाने पर ले रहे हैं। एग्जिट पोल में जिस तरह से चुनाव परिणाम दिखाए जा रहे हैं उसको लेकर बंगाल में तीव्र प्रतिक्रिया होती हुई दिख रही है। फिलहाल सभी की नजरें चुनाव आयोग के अंतिम आदेश पर टिकी हैं। एसजे/30/04/2026