अंतर्राष्ट्रीय
30-Apr-2026


भारत को मिलेगा 10 से 12 अरब डॉलर वाशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से ट्रंप के टैरिफ को अवैध घोषित करने के दो महीने से ज्यादा समय के बाद, वह दिन आने वाला है, जब इम्पोर्टर्स को टैरिफ का रिफंड मिलेगा। अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दायर एक अदालती आदेश के अनुसार, पहली किस्त का भुगतान लगभग 11 मई से शुरू होने की उम्मीद है। 26 अप्रैल तक, लगभग 17 लाख अप्रूव सामानों का सेटलमेंट हो चुका था और वे रिपेमेंट प्रॉसेस से गुजर रहे थे। कोर्ट दस्तावेजों से पता चलता है कि रिफंड में करीब 53 मिलियन आयातों के जरिए 330,000 से ज्यादा इम्पोर्टर से जमा किए गए करीब 166 बिलियन डॉलर के शुल्क शामिल हो सकते हैं। अगर भारत की बात करें तो अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स को रिफंड के तौर करीब 10 से 12 अरब डॉलर तक का फायदा हो सकता है। इस प्रॉसेस की देखरेख कर रहे जज रिचर्ड ईटन ने बताया कि टैरिफ के दायरे में आने वाले लगभग 21 प्रतिशत आयातित सामानों को कंसोलिडेटेड एडमिनिस्ट्रेशन एंड प्रोसेसिंग ऑफ एंट्रीज नामक नए सिस्टम के माध्यम से टैरिफ माफी के लिए अप्रूव कर लिया गया है। इनमें से करीब 3 फीसदी का सेटलमेंट हो चुका है और अब एक्टिव रिफंड प्रॉसेस में है, जिसमें अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से पेमेंट भी शामिल है। अगर भारत की बात करें तो अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स को रिफंड के तौर करीब 10 से 12 अरब डॉलर तक का फायदा हो सकता है। हालांकि यह रिफंड सीधे भारतीय एक्सपोट्र्स के बैंक खातों में नहीं आएगा। नियमों के अनुसार, रिफंड क्लेम केवल अमेरिकी इंपोर्टर्स ही दाखिल कर सकते हैं। भारतीय एक्सपोटर्स को इस रिफंड के लिए अपने अमेरिकी बायर्स के साथ उन ट्रेड को लेकर बातचीत करनी होगी। जब दोनों के बीच रिबेट शेयरिंग पर सहमति बन जाएगी, तो फिर भारतीय एक्सपोर्टर के अकाउंट में पैसा आ पाएगा। कोर्ट ने टैरिफ को माना था गैर-कानूनी गौरतलब है कि 20 फरवरी अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 6-3 के बहुमत से टैरिफ रद्द कर दिया था। अदालत ने माना कि ट्रंप ने अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (1977 का कानून) के तहत अपने अधिकार का दुरुपयोग किया था। यह कानून परंपरागत रूप से प्रतिबंधों और संपत्ति जब्ती के लिए इस्तेमाल किया जाता था, न कि बड़े इम्पोर्ट टैरिफ के लिए। संविधान कांग्रेस को टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, और अदालत ने पाया कि इस कानून में स्पष्ट रूप से इस उद्देश्य के लिए टैरिफ के उपयोग को रजिस्टर्ड नहीं किया गया है। विनोद उपाध्याय / 30 अप्रैल, 2026