भोपाल(ईएमएस)। एम्स भोपाल लगातार उन्नत और मरीज-केंद्रित चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से आम लोगों को नई उम्मीद दे रहा है। इसी दिशा में संस्थान के दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी विभाग) और न्यूरोसर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने एक जटिल मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए ललितपुर (उत्तर प्रदेश) की 65 वर्षीय महिला को छह से सात महीने से चल रहे असहनीय दर्द और लकवे जैसी स्थिति से राहत दिलाई। जानकारी के अनुसार, महिला रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद स्पास्टिक पैराप्लेजिया नामक गंभीर समस्या से जूझ रही थीं। इस स्थिति में मांसपेशियां बार-बार अनियंत्रित रूप से जकड़ जाती हैं, जिससे अत्यधिक दर्द होता है। हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें न दिन में आराम मिल रहा था और न ही रात में नींद। परिवार ने कई जगह इलाज कराया, दवाइयां बदलीं और खुराक बढ़ाई, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। लगातार दर्द के कारण न सिर्फ मरीज, बल्कि उनके परिजन भी मानसिक रूप से बेहद परेशान हो चुके थे। आखिरकार जब मरीज एम्स भोपाल पहुंचीं, तो दर्द चिकित्सा यूनिट के विशेषज्ञ डॉ. अनुज जैन के नेतृत्व में और न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. सुमित राज के सहयोग से उनकी जांच की गई। डॉक्टरों ने उनके लिए इंट्राथीकल बैक्लोफेन थेरेपी नामक उन्नत उपचार का सुझाव दिया। इस तकनीक में दवा को सीधे रीढ़ की हड्डी के आसपास मौजूद तरल (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड) में पहुंचाया जाता है, जिससे कम मात्रा में ही दवा असरदार तरीके से काम करती है और साइड इफेक्ट भी कम होते हैं। उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टरों ने ट्रायल के तौर पर इंट्राथीकल इंजेक्शन दिया। इसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा—मरीज की जकड़ी हुई मांसपेशियां तुरंत ढीली पड़ गईं और उन्हें तत्काल राहत मिल गई। इसके बाद स्थायी समाधान के रूप में डॉक्टरों ने उनकी त्वचा के नीचे एक छोटा-सा प्रोग्रामेबल इंट्राथीकल ड्रग डिलीवरी पंप सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया, जो लगातार नियंत्रित मात्रा में दवा देता रहता है। इस उपचार के बाद मरीज अब पूरी तरह दर्द और मांसपेशियों की जकड़न से मुक्त हैं। उन्हें सामान्य रूप से नींद आने लगी है और उनके परिजन भी काफी राहत महसूस कर रहे हैं। डॉ. अनुज जैन ने बताया कि यह थेरेपी उन मरीजों के लिए बेहद कारगर है, जिन्हें सामान्य दवाओं से राहत नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि जब इलाज उपलब्ध है, तो किसी भी मरीज को लंबे समय तक दर्द सहने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। वहीं, डॉ. सुमित राज ने इस सफलता का श्रेय टीमवर्क को देते हुए कहा कि दर्द चिकित्सा यूनिट और न्यूरोसर्जरी विभाग के समन्वित प्रयास से ही यह संभव हो पाया। यह भी महत्वपूर्ण है कि इंट्राथीकल बैक्लोफेन पंप प्रत्यारोपण देश के केवल कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही उपलब्ध है। निजी अस्पतालों में इस उपचार की लागत ₹10 लाख से अधिक होती है, जबकि एम्स भोपाल में यह सुविधा लगभग ₹7 लाख में उपलब्ध कराई गई, जो आम मरीजों के लिए बड़ी राहत है। हरि प्रसाद पाल / 01 मई, 2026