वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़ी डिजिटल मुद्रा योजना को लेकर नया विवाद सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस परियोजना से जुड़ी बड़ी मात्रा में डिजिटल संपत्ति को चुपचाप निजी निवेशकों को बेचा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। शुरुआत में इस योजना को पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था के विकल्प के रूप में पेश किया गया था और इसे वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में बड़ा कदम बताया गया था। लेकिन अब जिस तरह से संपत्तियों की बिक्री निजी हाथों में की जा रही है, उससे आम निवेशकों की भागीदारी और पहुंच पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, परियोजना ने अपनी रणनीति बदलते हुए खुले बाजार के बजाय संस्थागत और बड़े निवेशकों को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कदम तत्काल पूंजी जुटाने और बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए उठाया गया हो सकता है। हालांकि, इस बदलाव से यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह योजना वास्तव में आम लोगों के हित में है या फिर धीरे-धीरे कुछ बड़े निवेशकों तक सीमित होती जा रही है। सुबोध/०१-०५-२०२६