झाबुआ (ईएमएस)। कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने मेघनगर जनपद क्षेत्र के सजेली नानिया सात वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट क्रमांक 75, के अंतर्गत आने वाले संरक्षित बीट राखड़िया का निरीक्षण किया। इस दौरान कलेक्टर डॉ. भरसट ने एसडीएम, तहसीलदार एवं वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वन क्षेत्र का नियमित निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न हो, यह सुनिश्चित किया जाए, साथ ही पूर्व में हुई घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी स्थिति में न हो, इसके लिए विशेष सतर्कता बरती जाए। कलेक्टर ने वन क्षेत्र की स्पष्ट सीमा निर्धारण हेतु फेंसिंग कार्य कराने तथा नई जल संरचनाओं के निर्माण के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान सहायक कलेक्टर सुश्री आयुषी बंसल, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मेघनगर सुश्री अवनधती प्रधान, वन विभाग का अमला एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। जिला कलेक्टर द्वारा किए गए जा रहे निरीक्षण के दौरान वहां मौजूद वन मण्डलाधिकारी भारत सोलंकी ने कलेक्टर को बताया कि विभागीय अमले द्वारा क्षेत्र का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है तथा अस्थाई अतिक्रमण के साथ ही फसलों की कटाई के बाद अन्य अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही भी सतत रूप से की जा रही है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बांस प्लांटेशन एवं जल संवर्धन हेतु विभिन्न संरचनाओं के निर्माण के लिए परियोजना भी तैयार की जा रही है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 25 में मध्यप्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिला के मेघनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम सजेली नानजीसात (नान्यासाथ) के बीट क्रमांक 75 में दिसम्बर 2025 में बड़ी संख्या में गायों की निर्ममता पूर्वक जघन्य हत्या का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ था। लंबे समय से की जा रही गोकशी के हृदय विदारक मामले ने हिंदुओं की गौ के प्रति आस्था पर कुठाराघात किया था, परिणामस्वरूप जिले में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। हिंदू संगठनों द्वारा मामले में प्रशासनिक चूक का आरोप आरोप लगाते हुए आश्चर्य जताया गया था कि प्रशासन की नाक के नीचे हजारों की संख्या में गायों का वध किया गया है। हिंदू संगठनों द्वारा बड़े पैमाने पर गौवंश वध मामले में प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठाए गए थे। हिंदू संगठनों के प्रदेश नेताओं द्वारा उक्त गौहत्या मामले में तत्कालीन कलेक्टर नेहा मीना से बातचीत करते हुए मामले को गंभीरतम बताया गया था, साथ ही इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया गया था कि बगैर वन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के लंबे समय से गौहत्या का सिलसिला आखिर कैसे चलता रहा। विभिन्न हिंदू संगठनों द्वारा पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर वन विभागीय अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की गई थी। - ईएमएस / 2/5/2026