राष्ट्रीय
02-May-2026
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यह पूरी तरह स्वदेशी, ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को देगा मजबूती नई दिल्ली,(ईएमएस)। पूरी तरह से स्वदेशी और अत्याधुनिक तकनीक से लैस युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’ को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। इससे नौसेना की समुद्री ताकत में इजाफा हुआ। अधिकारियों ने बताया कि मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने इस युद्धपोत को तैयार किया है। नीलगिरि-श्रेणी का यह छठा युद्धपोत है। इसका निर्माण पूरी तरह से भारत में ही हुआ है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देता है। इसे दुश्मन की नजरों से बचने यानी स्टेल्थ क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है। समुद्र में यह लंबे समय तक टिक सकता है और कई तरह के मिशन संभालने में सक्षम है। जानकारी के मुताबिक इस युद्धपोत को खास तौर पर खतरनाक बनाती हैं इसकी हथियार प्रणालियां। इसमें दूर तक मार करने वाली आठ ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात हैं। इसके अलावा सतह से सतह पर मार करने वाली बराक मिसाइल प्रणाली भी मौजूद है। पनडुब्बियों से निपटने के लिए इसमें टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं, जो इसे उन्नत युद्ध क्षमता से लैस बनाते हैं। ‘स्टेल्थ’ तकनीक का मतलब है छिपने की कला। इससे बने युद्धपोतों को दुश्मन के रडार आसानी से पकड़ नहीं पाते। महेंद्रगिरि भी इसी तकनीक से बना है। ‘फ्रिगेट’ मझोले आकार के युद्धपोत होते हैं, जो तेज रफ्तार और ताकतवर हथियारों से लैस हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने से समुद्री सुरक्षा काफी मजबूत होगी। यह युद्धपोत समुद्र में दूर तक नजर रखने और दुश्मनों को रोकने में मदद करेगा। इसके अत्याधुनिक हथियार व सेंसर नौसेना की मारक क्षमता को बढ़ाएंगे। हिंद महासागर में भारत की स्थिति और भी मजबूत होगी। सिराज/ईएमएस 02मई26 -----------------------------