कोरबा (ईएमएस)। कोरबा जिले का औद्योगिक और कोलरी क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। जानकारी के अनुसार डीज़ल की भारी किल्लत और कुदुरमाल पुल के टूटने से उत्पन्न स्थिति ने पूरे परिवहन तंत्र को चरमरा कर रख दिया है। हालात ऐसे हैं कि हर दिन नुकसान का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस पहल अब तक नदारद है। कोरबा कोलरी क्षेत्र में प्रतिदिन हजारों ट्रक संचालित होते हैं, जो कोयला परिवहन से लेकर अन्य औद्योगिक गतिविधियों की रीढ़ माने जाते हैं। लेकिन डीज़ल की कमी ने इस व्यवस्था को लगभग ठप्प कर दिया है। ट्रांसपोर्टरों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ट्रकों की लंबी कतारें पेट्रोल पंपों पर देखी जा रही हैं। कई वाहन आधे रास्ते में ही खड़े होने मजबूर हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर उद्योग, रोजगार और राजस्व पर गहरी चोट कर रही है। - कुदुरमाल पुल का टूटा ढांचा बढ़ाता बोझ डीज़ल संकट के बीच कुदुरमाल पुल का टूटना मानो “घाव पर नमक” साबित हुआ है। पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण ट्रकों को करीब 30 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। प्रतिदिन लगभग 1000 ट्रक इस लंबी दूरी से गुजर रहे हैं। अतिरिक्त डीज़ल खपत से रोजाना लाखों रुपये की बर्बादी, समय की बर्बादी और परिवहन लागत में भारी इजाफा सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि संसाधनों की खुली बर्बादी है। - करोड़ों का नुकसान, जिम्मेदार कौन ? विशेषज्ञों का कहना है कि इस अतिरिक्त दूरी और डीज़ल खपत से सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का अप्रत्यक्ष नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही प्रदूषण में लगातार वृद्धि हो रही है। सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। आम नागरिकों को भी महंगाई और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। - प्रशासन की उदासीनता पर उठे सवाल सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रशासन आखिर चुप क्यों है ? क्या जिम्मेदार अधिकारी जमीनी हकीकत से अनजान हैं, या फिर जानबूझकर इस संकट को नजरअंदाज किया जा रहा है ? - समाधान की मांग, अब नहीं तो कब ? स्थानीय लोगों, ट्रांसपोर्टरों और जनप्रतिनिधियों की एक ही मांग है की कुदुरमाल पुल की तत्काल मरम्मत या नया निर्माण करा जाए, जब तक ट्रकों के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए, डीज़ल आपूर्ति को सामान्य करने के लिए आपात कदम उठाया जाए। - 02 मई