* वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण मंत्री ने बताया-2050 तक 2 ट्रिलियन डॉलर योगदान का लक्ष्य सूरत (ईएमएस)| वाइब्रेंट गुजरात रिजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) के अंतर्गत वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया तथा राज्य मंत्री प्रवीण माली की उपस्थिति में “गुजरात के चक्रीय ऊर्जा परिवर्तन को सक्षम बनाना: नीतियां, साझेदारियां और मार्ग” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि बदलते समय में कचरा अब समस्या नहीं, बल्कि एक ‘रिसोर्स मटेरियल’ बन चुका है। उन्होंने बताया कि घरेलू कचरे का भी अब ऊर्जा उत्पादन के स्रोत के रूप में उपयोग किया जा रहा है। सर्कुलर इकॉनमी के मार्ग पर चलते हुए राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि के नए अवसर विकसित कर रही है। मंत्री ने आगे कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास के साथ उसकी स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि औद्योगिक इकाइयाँ समाज और पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाएँ। फ्लाई-ऐश और डंपिंग यार्ड के कचरे का उपयोग आज ऊर्जा और अन्य उपयोगी उत्पादों के निर्माण में किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सर्कुलर इकॉनमी के माध्यम से गुजरात वर्ष 2050 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के योगदान का लक्ष्य हासिल करने में अग्रणी रहेगा। राज्य मंत्री प्रवीण माली ने पर्यावरण और उद्योगों के सह-अस्तित्व तथा पर्यावरण सुरक्षा के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने उद्योगपतियों से नवाचार अपनाकर गुजरात को अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल स्टेट बनाने का आह्वान किया। गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) के अध्यक्ष आर.बी. बारड ने में सेमिनार के उद्देश्य और सर्कुलर इकॉनमी नीतियों की विस्तृत जानकारी दी। पैनल चर्चा के दौरान उद्योगपतियों और विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर जीपीसीबी-सूरत के क्षेत्रीय अधिकारी अरुण पटेल, विभिन्न उद्योगपति, टेक्नोलॉजिस्ट और पर्यावरणविद उपस्थित रहे। सतीश/02 मई