क्षेत्रीय
02-May-2026
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कथा में धूमधाम से मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव दमोह (ईएमएस)। सुनार नदी के तट पर स्थित सर्व ब्राह्मण धर्मशाला में श्रीमती विमला परसोत्तम पन्या परिवार द्वारा संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन कथावाचक पं. वीरेन्द्र शास्त्री जी महाराज ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतान के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा के दौरान जैसे भगवान का जन्म हुआ तो पूरा कथा स्थल नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा। लोग झूमने नाचने लगे। भगवान श्रीकृष्ण के वेश में नन्हे बालक के दर्शन करने के लिए लोग लालायित नजर आ रहे थे। भगवान के जन्म की खुशी पर महिलाओं ने अपने घरों से लाए गुड़ के लड्डुओं से भगवान को भोग लगाया। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने आमोद प्रमोद के साथ कई राक्षसों का संहार किया और लोगों का कल्याण किया। उन्होंने भगवान कृष्ण की कई लीलाओं का वर्णन किया। पं. वीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में लिखे मंत्र और श्लोक केवल भगवान की आराधना और उनके चरित्र का वर्णन ही नहीं है। श्रीमद्भागवत की कथा में वह सारे तत्व हैं जिनके माध्यम से जीव अपना तो कल्याण कर ही सकता है साथ में अपने से जुड़े हुए लोगों का भी कल्याण करता है। जीवन में व्यक्ति को अवश्य ही भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बिना आमंत्रण के भी अगर कहीं भागवत कथा हो रही है तो वहां अवश्य जाना चाहि। शास्त्री जी ने संतों के संबंध में कहा है कि संत का परिचय संत का भेष नहीं होता है। उनका तो मुख्य भेष उनका गुण होता है। उन्होंने श्रीकृष्ण एवं श्रीराम से संस्कार की सीख लेने की बात कही। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जानते थे कि वह परमात्मा हैं। उसके बाद भी वह अपने माता पिता, गुरु के चरणों को प्रणाम करने में कभी संकोच नहीं करते थे। यह सीख भगवान श्रीकृष्ण से सभी को लेनी चाहिए। कथा के दौरान अजब धाम से छोटे सरकार, जी विधायक उमादेवी खटीक, पूर्व विधायक पीएल तंतुवाय, जनपद अध्यक्ष गंगाराम पटेल, निरीक्षक सरोज ठाकुर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। ईएमएस2मोहने/ 02 मई 2026