ज़रा हटके
03-May-2026
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टोक्या (ईएमएस)। लगभग 10 करोड़ साल पहले क्रीटेशियस काल के समुद्रों में ऐसे विशाल ऑक्टोपस मौजूद थे, जिनकी लंबाई 65 फीट (करीब 19 मीटर) तक होती थी। ये जीव आज की व्हेल मछली के बराबर आकार के थे और इन्हें समुद्र का निर्विवाद राजा माना जाता था। जापानी वैज्ञानिकों की इस नई खोज ने प्राचीन समुद्री इतिहास को देखने का हमारा नजरिया पूरी तरह बदल दिया है। जापान की होक्काइडो यूनिवर्सिटी के जीवाश्म विज्ञानी शिन इकेगामी और यासुहिरो इबा के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने हालिया वैज्ञानिक रिसर्च में यह चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह रिसर्च बताती है कि दुनिया में मेगालोडन जैसी विशालकाय शार्क के उदय से भी पहले, ये ऑक्टोपस समुद्र के शीर्ष शिकारी थे। शोधकर्ताओं के अनुसार, नानाइमोटेथिस हैगार्टी नामक यह ऑक्टोपस प्रजाति 7 से 19 मीटर तक लंबी हो सकती थी, जबकि मेगालोडन की लंबाई आमतौर पर 13 से 18 मीटर के बीच मानी जाती है। इसका मतलब है कि ये प्राचीन ऑक्टोपस आकार में मेगालोडन के बराबर या उससे भी बड़े थे। इनके जबड़े इतने शक्तिशाली थे कि वे अपने समय के बड़े समुद्री जीवों की हड्डियों को आसानी से चकनाचूर कर सकते थे, जो इन्हें अपने युग का सबसे दुर्जेय शिकारी बनाता था। इस असाधारण खोज के लिए टीम ने 27 अलग-अलग जीवाश्मों का गहन अध्ययन किया। इनमें से कुछ जीवाश्म पहले से ही संग्रहालयों में मौजूद थे, जबकि 12 नए जीवाश्म डिजिटल फॉसिल माइनिंग नामक अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके खोजे गए। इस तकनीक में चट्टानों की परतों को सावधानीपूर्वक घिसकर और फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से उनकी त्रि-आयामी संरचना को डिजिटल रूप से दोबारा तैयार किया गया। इस विस्तृत विश्लेषण से न केवल इन जीवों के विशाल आकार की पुष्टि हुई, बल्कि इनके शिकार करने की आक्रामक प्रकृति और शक्तिशाली जबड़ों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली। आमतौर पर, ऑक्टोपस जैसे कोमल शरीर वाले जीवों के जीवाश्म मिलना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि उनका शरीर समय के साथ आसानी से नष्ट हो जाता है। हालांकि, इन प्राचीन ऑक्टोपस के बेहद सख्त जबड़े, जिन्हें बीक कहा जाता है, पत्थर बनकर लाखों सालों तक सुरक्षित रहे। वैज्ञानिकों ने आधुनिक ऑक्टोपस की 12 प्रजातियों के जबड़ों से इन प्राचीन जबड़ों की तुलना की। रिसर्च से पता चला कि इन जीवों ने अपने शरीर पर बाहरी कवच (शेल) विकसित करने के बजाय, अपनी गति और विशाल आकार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। कवच के हटने से ये जीव तेजी से तैरने और अत्यधिक बड़े आकार में विकसित होने में सक्षम हुए, जो विकास का एक ऐसा पैटर्न था जो समुद्री रीढ़ वाले जीवों में भी देखा गया था। शक्तिशाली जबड़ों और गतिमान, कोमल शरीर के इस संयोजन ने इन्हें क्रीटेशियस काल का सबसे सफल शिकारी बना दिया। इस रिसर्च का एक और चौंकाने वाला पहलू इन प्राचीन ऑक्टोपस की संभावित बुद्धिमत्ता से जुड़ा है। वैज्ञानिकों ने जीवाश्मों के जबड़ों पर घिसाई के विशिष्ट निशान देखे, जो एक तरफ ज्यादा थे। इस व्यवहार को लेटरैलिटी कहा जाता है, जिसका अर्थ है शरीर के किसी एक तरफ के हिस्से का दूसरों की तुलना में अधिक उपयोग करना, ठीक वैसे ही जैसे इंसान अपने दाएं या बाएं हाथ का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। आधुनिक विज्ञान में इस तरह के व्यवहार को एक विकसित मस्तिष्क और उच्च बुद्धिमत्ता का संकेत माना जाता है। यह इंगित करता है कि 100 मिलियन साल पहले भी ये ऑक्टोपस बहुत समझदार थे और सोच-समझकर शिकार करते थे। उनके जबड़ों पर मिले टूट-फूट के निशान इस बात की भी पुष्टि करते हैं कि वे अपने शिकार की हड्डियों को कुचलने में बहुत आक्रामक थे। यह साबित करता है कि वे केवल आकार में ही विशाल नहीं थे, बल्कि मानसिक रूप से भी अपने दौर के अन्य शिकारियों से बहुत आगे थे। सुदामा/ईएमएस 03 मई 2026