ज़रा हटके
03-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। बीपी एवं डायबिटिज के मरीजों द्वारा बगैर डॉक्टरी सलाह के अचानक दवा छोडना जानलेवा साबित हो सकता है। अक्सर लोग अपने ब्लड प्रेशर के स्तर को सामान्य देखकर खुद को पूरी तरह स्वस्थ मान बैठते हैं और फिर मनमानी तरीके से अपनी दवाएँ बंद कर देते हैं। वे यह नहीं समझते कि शरीर में किसी भी बाहरी या अंदरूनी कारण से, जैसे कि गुस्सा, अत्यधिक मानसिक तनाव या मौसम में अचानक बदलाव होने पर, ब्लड प्रेशर तेज़ी से अनियंत्रित होकर स्पाइक कर सकता है। ऐसे समय में, जब शरीर दवा के सुरक्षा घेरे में नहीं होता, तो रक्तचाप में यह अचानक वृद्धि नसों में अत्यधिक सूजन पैदा कर सकती है या उन्हें फाड़ भी सकती है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, कई बार लोग अचानक गिर जाते हैं, बेहोश हो जाते हैं, और दुखद रूप से कुछ मामलों में उनकी मौके पर ही मौत भी हो जाती है। इन अधिकतर अप्रत्याशित घटनाओं के पीछे साइलेंट किलर के रूप में उच्च रक्तचाप ही मुख्य कारण होता है, जो बिना किसी बड़े लक्षण के अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान पहुँचाता रहता है। विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर देते हैं कि केवल दवाएँ लेना ही काफी नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही अनिवार्य है। मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए हर दिन कम से कम 25 मिनट का मेडिटेशन (ध्यान) करना अत्यंत लाभकारी है। इसके साथ ही, शरीर के अतिरिक्त फैट को कम करने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए 40 से 45 मिनट तक नियमित व्यायाम करना भी अनिवार्य है। खान-पान पर सख्त नियंत्रण रखकर और मोटापे को कम करके ही ब्रेन स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों से प्रभावी ढंग से बचा जा सकता है। यह एक समग्र दृष्टिकोण है जिसमें दवा और जीवनशैली दोनों का महत्वपूर्ण स्थान है। इसके अलावा, शरीर द्वारा दिए गए कुछ महत्वपूर्ण संकेतों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। जानकारों के अनुसार, शरीर में लगातार खुजली होना, हाथों-पैरों में सूनापन महसूस होना, कमर और गर्दन की नसों में अकड़न रहना, या पैरों की नसों का मोटा और नीला दिखाई देना – ये सभी स्पष्ट संकेत हैं कि आपकी जीवनशैली और बीमारी की स्थिति को तुरंत डॉक्टरी सलाह की आवश्यकता है। सुदामा/ईएमएस 03 मई 2026