राज्य
03-May-2026


* “विजन 2030: गुजरात में लैंड गवर्नेंस का भविष्य” थीम पर होगा मंथन, डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता पर विशेष जोर गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में 5 से 7 मई, 2026 के दौरान अडालज स्थित त्रिमंदिर में राज्य सरकार के राजस्व विभाग की तीन दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया जाएगा। “विजन 2030: गुजरात में लैंड गवर्नेंस का भविष्य” जैसी महत्वाकांक्षी थीम पर आधारित इस शिविर में राज्य के प्रशासनिक ढांचे को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। इस चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राज्य के मंत्री हर्ष संधवी, राजस्व राज्य मंत्री संजयसिंह महिडा सहित वरिष्ठ सचिव, उच्च अधिकारी और विषय विशेषज्ञ भाग लेकर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जयन्ती रवि ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @ 2047” के विजन को साकार करने में गुजरात अग्रणी भूमिका निभाएगा। इसी उद्देश्य से “विकसित गुजरात से विकसित भारत” का मंत्र दिया गया है। राज्य को विकसित बनाने के लिए राजस्व विभाग का स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में यह चिंतन शिविर महत्वपूर्ण साबित होगा। इस शिविर में राजस्व विभाग की वर्तमान नीतियों की समीक्षा की जाएगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने हेतु बाधाओं को दूर करने पर विचार किया जाएगा। डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से नागरिक सेवाओं में तेजी और पारदर्शिता लाने पर विशेष जोर रहेगा। भूमि प्रबंधन में नई तकनीकों के उपयोग से जनता का विश्वास बढ़ाने की दिशा में यह मंच अहम भूमिका निभाएगा। चिंतन शिविर के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा होगी, जिनमें पेपरलेस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम, जनसेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही, भूमि अभिलेखों का डिजिटाइजेशन एवं अद्यतन जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा भूमि सर्वे एवं पुनः सर्वेक्षण तथा आपदा प्रबंधन के लिए आधुनिक रणनीतियों पर भी मंथन किया जाएगा। इस आयोजन में जिला कलेक्टर, प्रांत अधिकारी और क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारी भी भाग लेंगे। साथ ही इसरो, बीआईएसएजी-एन, आईआईटी, आईआईएम, इग्नू और सर्वे ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ भी अपनी सहभागिता देंगे। विभिन्न विषयों पर समूह चर्चा, केस स्टडी और विशेषज्ञ व्याख्यान के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान किया जाएगा। विभागीय सुधारों के लिए अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों और कानूनी विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया जाएगा, ताकि श्रेष्ठ पद्धतियों को अपनाया जा सके। पूर्व में आयोजित एक्शन सेमिनार के व्हाइट पेपर्स और उन पर हुई कार्रवाई की समीक्षा भी इस शिविर में की जाएगी। चिंतन शिविर के अंत में राजस्व विभाग के लिए एक स्पष्ट, व्यावहारिक और लागू करने योग्य रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस पहल से राज्य के भूमि शासन में क्रांतिकारी बदलाव आने और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को और मजबूत बनाने की उम्मीद है। सतीश/03 मई