राज्य
03-May-2026


मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई को विश्वस्तरीय शहर बनाने के उद्देश्य से बनाए गए साइकिल ट्रैक अब बेकार साबित हो रहे हैं। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में करीब 60 करोड़ रुपये खर्च कर बनाए गए साइकिल ट्रैक को अब हटाया जा रहा है, जिसके लिए अतिरिक्त 25 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस तरह करोड़ों रुपये का खर्च व्यर्थ जाता दिख रहा है। दरअसल बीकेसी में देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियों के मुख्यालय हैं। यहां साइकिल ट्रैक बनाने के पीछे पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने का उद्देश्य था, लेकिन कुछ ही वर्षों में इसे हटाने की नौबत आ गई। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के कारण ट्रैक हटाया जा रहा है। हालांकि जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना शुरू करने से पहले भविष्य की यातायात जरूरतों और उपयोगिता का सही आकलन किया जाना चाहिए था। जानकार यह भी बताते हैं कि साइकिल ट्रैक तभी सफल होते हैं जब वे लगातार और लंबी दूरी तक जुड़े हों। मुंबई में ऐसे ट्रैक का नेटवर्क नहीं होने के कारण लोग साइकिल का उपयोग करने के लिए प्रेरित नहीं होते। बीकेसी क्षेत्र में आने वाले वर्षों में मेट्रो और पॉड टैक्सी जैसी नई परिवहन सेवाएं शुरू होने वाली हैं। एमएमआरडीए का मानना है कि इन सुविधाओं के आने के बाद साइकिल ट्रैक की जरूरत कम हो जाएगी। हालांकि, इस फैसले के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अभी ट्रैक हटाना जरूरी था। इसके अलावा, पश्चिमी एक्सप्रेस हाईवे पर वांद्रे से वाकोला के बीच अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार फुटपाथ और साइकिल ट्रैक विकसित करने की योजना थी। कलानगर से खेरवाड़ी तक थर्मोप्लास्टिक फिनिश वाला ट्रैक भी बनाया गया, लेकिन यह बहुत छोटे हिस्से में सीमित है और उपयोग न होने के कारण अब सिर्फ दिखावे की चीज बनकर रह गया है। यह परियोजना महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। ऐसे में भविष्य में इस ट्रैक के विस्तार की संभावना भी कम नजर आ रही है। संजय/संतोष झा- ०३ मई/२०२६/ईएमएस