क्षेत्रीय
03-May-2026


ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने से हादसों में लाई जा सकती है कमी सड़क हादसों में प्रमुख कारण नियमों की अनदेखी बेहद चिंताजनक सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश श्री अभय मनोहर सप्रे ने सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों की समीक्षा की नर्मदापुरम (ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश श्री अभय मनोहर सप्रे ने रविवार को अपने नर्मदापुरम प्रवास के दौरान कलेक्टर कार्यालय के सभा कक्ष में सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों की समीक्षा की। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने जिला सड़क सुरक्षा समिति के साथ बैठक कर जिले में पिछले 5 वर्षों में हुए हादसों उनके कारण तथा हादसों के दौरान हुई मृत्यु की विस्तार पूर्वक समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पिछले वर्षों में सड़क सुरक्षा समिति की आयोजित बैठकों की जानकारी भी ली तथा उन बैठकों के दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े हुए मामलों में क्या सुधार कार्य किए गए हैं इसकी जानकारी भी ली। बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री साई कृष्ण एस थोटा, अपर कलेक्टर श्री अनिल जैन, डिप्टी कलेक्टर श्रीमती सरोज परिहार, डीएसपी श्री संतोष मिश्रा, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी श्री पीके कापसे सहित अन्य संबंधित अधिकारी गण उपस्थित रहे। बैठक के दौरान एसपी श्री साई कृष्ण एस थोटा द्वारा बताया गया कि जिले में केवल एक ब्लैक स्पॉट शेष है जिसे खत्म करने के लिए बनाई गई कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। साथ ही इस ब्लैकस्पॉट पर वर्ष 2026 में अभी तक कोई भी जनहानि नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त विगत 5 वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण के पश्चात यह बात सामने आई है कि जिले में सर्वाधिक दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या हेलमेट का उपयोग न करने की वजह से है। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि सड़क हादसों में हेलमेट ना उपयोग करने के कारण होने वाली मृत्यु की बढ़ती हुई संख्या बेहद चिंताजनक है। लोगों को हेलमेट उपयोग करने के लिए जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करवाने के लिए हमें किसी भी विभाग का अधिकारी अथवा कर्मचारी होने की आवश्यकता नहीं है। यह हम सब का मानवीय कर्तव्य है कि दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को रोका जाए। उन्होंने कहा कि नियमों की अनदेखी के कारण सड़क हादसे में होने वाली मृत्यु यह स्पष्ट करती है कि लोगों में नियमों के प्रति संवेदनशीलता अभी भी बहुत कम है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक नियमों का पालन करने की प्रवृत्ति को हर हाल में सुदृढ़ करना ही होगा। न्यायमूर्ति सप्रे ने अधिकारियों से कहा, आप सभी को यह सुनिश्चित करना है कि सड़क हादसे क्यों हो रहे हैं, उनके कारण क्या हैं और उन्हें कैसे रोका जा सकता है। इसके लिए व्यापक कार्य योजना बनाकर उसे गंभीरता से क्रियान्वित करें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के शेष बचे हुए माहों में प्रयास करें कि उक्त अवधि में सड़क हादसों कम से कम हो अथवा उनमें न्यूनतम मृत्यु हो या मृत्यु दर को शून्य ही कर दिया जाए। बैठक के दौरान बताया गया कि वर्ष 2025 में बाद के छह माह में दुर्घटनाओं में 20.92 प्रतिशत, घायलों में 32% एवं मृत्यु दर में 33.12% कमी आई है। वर्ष 2026 के चार माह में दुर्घटनाओं में 10.34 फ़ीसदी की कमी आई है एवं मृत्यु दर में 21.69 प्रतिशत की कमी आई है। नर्मदापुरम पुलिस द्वारा सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं मृत्यु में कमी लाने के लिए वर्ष 2026 में 136 सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 3735 नागरिकों को प्रशिक्षित किया गया। ट्रैक्टर ट्राली अभियान के अंतर्गत 1200 ट्रैक्टर ट्राली पर रेडियम रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं एवं कृषको को जागरूक करने के लिए 83 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 3656 लोगों को जागरूक किया गया है। जिले भर में यातायात जागरूक कार्यक्रम के अंतर्गत 275 कार्यक्रम आयोजित कर 25,700 लोगों को समझाइश दी गई है। यातायात नियमों के उल्लंघन और बिना हेलमेट के प्रकरणों में 1252 लाइसेंस निलंबन हेतु अनुशंसा की गई है जिनमें से 151 लाइसेंस निलंबित किए गए हैं शेष प्रकरणों में कार्यवाही की जा रही है। वर्ष 25 में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के कारणों की समीक्षा पर पाया गया कि दोपहिया वाहन चालकों का मृत्यु में संख्या लगभग 54 प्रतिशत है इसमें 78 प्रतिशत चालक बिना हेलमेट पहने थे। इसी प्रकार चार पहिया वाहनों में 12 प्रतिशत चालक बिना सीट बेल्ट के थे, दुर्घटना के कारणों में 76 प्रतिशत तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाने, 3.5 प्रतिशत ड्रिंक ऐंड ड्राइव की वजह से एवं 7 प्रतिशत गलत तरीके से ओव्हरटेकिंग करने की वजह से घटित हुई हैं। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि सड़क हादसों में जनहानि होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अगर हम मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो सड़क हादसों में केवल पीड़ित ही नहीं बल्कि उसका पूरा परिवार भी इस विपत्ति के कारण कष्टों का सामना करता है। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने घटनाओं का उल्लेख करते हुए दुर्घटनाओं में पीड़ित व्यक्तियों को हुए मानसिक एवं शारीरिक कष्टों के बारे में भी चर्चा की। बैठक के दौरान न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु के लिए बिना हेलमेट के यात्रा, बिना सीट बेल्ट के यात्रा, निर्धारित गति सीमा से अधिक गति से गाड़ी चलाना तथा ड्रिंक एंड ड्राइव जैसे कारण भी प्रमुख है। उन्होंने कहा इन सब के अतिरिक्त इंजीनियरिंग फैलियर भी सड़क हादसों को आमंत्रित करने की एक प्रमुख वजह है। उन्होंने कहा कि खराब इंजीनियरिंग तथा गुणवत्ता हीन सड़कों के निर्माण के लिए संबंधितों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी की जाना सुनिश्चित किया जाए। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि सड़कों का खराब निर्माण करने वाले ठेकेदारों को भी ब्लैक लिस्ट किया जाए तथा सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में वह किसी भी प्रकार के परियोजना में कार्य न कर सके। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने मध्य प्रदेश में होने वाले सड़क हादसों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाना बहुत आवश्यक है। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि सड़क पर चलने वाले हर एक व्यक्ति का जीवन बहुत ही बहुमूल्य है। समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि किसी अन्य की गलती से सड़क पर चलने वाले निर्दोषों की मृत्यु होना या जीवन भर के लिए हादसे की विभीषिका झेलना न्यायसंगत नहीं है। इस स्थिति को सुधारना हमारी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आम जनमानस के बीच यह जागरूकता लाई जाए कि हेलमेट लगाने से दुर्घटनाओं में जनहानि को रोका जा सकता है। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि जन जागरूकता अभियान के माध्यम से हेलमेट की उपयोगिता लोगों को बताएं। सड़क हादसों में घायल होने वाले तथा जान गंवाने वाले लोगों में सबसे अधिक 20 से 45 आयु वर्ग के युवा होते हैं इसीलिए विशेष तौर पर युवाओं को हेलमेट न पहनने एवं अधिक गति से वाहन चलाने के दुष्प्रभावों से अवगत कराने के लिए उन्हें जागरूक करें। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि ड्रिंक एंड ड्राइव तथा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध बिना किसी दबाव के सख्त से सख्त कार्यवाही की जाना भी सुनिश्चित करें। उन्होंने सुझाव दिया कि शासकीय कार्यालय में भी अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए सीट बेल्ट तथा हेलमेट का नियम लागू किया जाए। एक अन्य सुझाव देते हुए श्री सप्रे ने कहा कि जिले के पेट्रोल पंप पर हेलमेट पहनना एवं सीट बेल्ट लगाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया जाए। इसी प्रकार सड़कों पर पर्याप्त मात्रा में संकेतक और साइनेज लगाए जाएं। मुख्य स्थान पर गति अवरोधकों को भी स्थापित करें। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि हाईवे एवं मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा निरंतर पेट्रोलिंग की भी सख्त आवश्यकता है। कई हादसों में हाईवे पर अव्यवस्थित तरीके से पार्क किए गए वाहन भी वजह बनते है जिसके लिए विभाग को सतत प्रयास करने होंगे। साथ ही सड़क हादसों की एक प्रमुख वजह आवारा मवेशियों का मुख्य मार्गों पर विचरण करना भी अत्यंत चिंताजनक है जिसके लिए प्रशासन को विशेष रूप से मेहनत करने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी जन कल्याण के लिए अपने कर्तव्य का शत प्रतिशत निर्वहन करें और प्रयास करें कि कोई भी सड़क हादसों में बिना वजह न मरे। ईएमएस/राजीव अग्रवाल/ 03 मई 2026