नई दिल्ली,(ईएमएस)। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद आज 4 मई का दिन बेहद निर्णायक होने जा रहा है। सोमवार को मतगणना के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तूफानी चुनाव प्रचार ने जनता के मन पर कितना प्रभाव डाला है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से प्रधानमंत्री ने इन सभी क्षेत्रों में कुल 29 चुनाव प्रचार अभियानों में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने रैलियों, जनसभाओं और मेगा रोड शो के जरिए मतदाताओं को साधने की कोशिश की। प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी कार्यक्रमों का सबसे बड़ा केंद्र पश्चिम बंगाल रहा। यहां उन्होंने कुल 19 जिलों के 24 शहरों और क्षेत्रों में रैलियां कीं। 15 मार्च को चुनाव की घोषणा के बाद से उन्होंने कोलकाता से लेकर मुर्शिदाबाद और बैरकपुर तक भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया। विशेषकर उत्तर 24 परगना जिले में प्रधानमंत्री ने सर्वाधिक चार बार मोर्चा संभाला, जिसमें पानीहाटी, दमदम और बनगांव के ठाकुरनगर जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल थे। 2021 के चुनाव में इस जिले की 33 सीटों में से भाजपा को केवल पांच पर जीत मिली थी, ऐसे में इस बार प्रधानमंत्री के सघन प्रचार से पार्टी को बड़े उलटफेर की उम्मीद है। कोलकाता और हुगली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी प्रधानमंत्री ने दो-दो बार जनसभाएं कीं। कोलकाता की 11 सीटों पर पिछला प्रदर्शन भाजपा के लिए शून्य रहा था, जिसे बदलने के लिए इस बार मेगा रोड शो का सहारा लिया गया। वहीं, दक्षिण 24 परगना, जो सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, वहां भी प्रधानमंत्री ने दो रैलियां कीं। पिछली बार इस जिले की 31 में से 30 सीटों पर टीएमसी का कब्जा था, जहां भाजपा अपना खाता तक नहीं खोल पाई थी। पश्चिम बंगाल के अलावा प्रधानमंत्री ने असम, तमिलनाडु और केरल में भी चुनावी रैलियों को संबोधित किया, जबकि पुदुचेरी में उनका सबसे संक्षिप्त चुनावी कार्यक्रम रहा। असम में जहां भाजपा अपनी सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं तमिलनाडु और केरल में प्रधानमंत्री का जोर गठबंधन की मजबूती और पार्टी के आधार विस्तार पर रहा। आज के नतीजे न केवल इन राज्यों की अगली सरकारों का भविष्य तय करेंगे, बल्कि यह भी साबित करेंगे कि प्रधानमंत्री की जनसभाएं मतों में कितनी तब्दील हो पाई हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/04मई 2026