राज्य
04-May-2026
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- मप्र में दिखेगा नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक का असर भोपाल (ईएमएस)। संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक गिरने के बाद भाजपा देश भर में राजनीति में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर अभियान चला रही है। वहीं मप्र में मोहन सरकार ने देश में सबसे पहले नारी शक्ति वंदन को लेकर विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित कर संकल्प पारित करवाया है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में मप्र राजनीति में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक का असर दिखेगा। इसका पहला असर राज्यसभा चुनाव में दिख सकता है। भाजपा मप्र की अपनी दो सीटों में से एक पर किसी महिला उम्मीदवार को उतार कर राज्यसभा भेज सकती है। मप्र में राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हो गई हैं। इन सीटों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया इसी महीने से शुरू होने के आसार हैं। रिक्त हुई सीटों में से दो भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते की है। ऐसे में दोनों दलों के सामने अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन को लेकर रणनीतिक निर्णय लेने की चुनौती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बदली हुई परिस्थितियों में भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपने सकारात्मक रुख को ध्यान में रखते हुए रिक्त हुई दो सीटों में से एक पर महिला उम्मीदवार को मौका दे सकती है। इससे न केवल संगठन में महिला नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देशभर में महिलाओं के बीच एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा। महिला आरक्षण को लेकर भाजपा आक्रामक गौरतलब है कि राजनीति में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने को लेकर भाजपा आक्रामक रूख अपनाए हुए है। दरअसल, गत 17 अप्रैल को संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक गिरने के बाद भाजपा देश भर में अभियान चला रही है। इसके जरिए कांग्रेस और पूरे विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी और स्वयं को महिला आरक्षण समर्थक बताया जा रहा है। मप्र में नारी शक्ति वंदन को लेकर गत 27 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया गया। विशेष सत्र के दौरान जहां भाजपा ने महिला आरक्षण लागू नहीं किए जाने के लिए कांग्रेस को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया, वहीं कांग्रेस ने सवाल उठाया कि लोकसभा व विधानसभा की मौजूदा सीटों पर तत्काल 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से सरकार क्यों पीछे हट रही है? अब चूंकि राज्यसभा के चुनाव जल्द होने वाले हैं, ऐसे में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उम्मीदवार चयन में अहम भूमिका निभा सकता है। कांग्रेस के सामने चुनौती वहीं, कांग्रेस के सामने भी अपनी एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार का चयन किसी चुनौती से कम नहीं है। पार्टी उम्मीदवार चयन में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर निर्णय लेगी। पार्टी में शीर्ष स्तर पर उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है। राज्यसभा के दावेदार भी सीट पक्की करने के लिए अपने स्तर पर हर संभव प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने राज्यसभा के लिए महिला उम्मीदवार संबंधी सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विषय उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है, लेकिन वे महिला उम्मीदवार संबंधी सुझाव पार्टी फोरम तक जरूर पहुंचा देगी। बता दें कि मप्र से भाजपा के राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और कांग्रेस से राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का कार्यकाल गत 9 अप्रैल को समाप्त हो चुका है। राज्यसभा की इन तीनों रिक्त सीटों पर जल्द चुनाव होगा। पिछले दिनों मप्र में जिस तरह के राजनीतिक घटनाक्रम सामने आए हैं, उसे देखकर राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगा जा रहे हैं कि कांग्रेस के कब्जे वाली रिक्त हुई राज्यसभा सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार उतार सकती है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी यह आंकलन कर रही है कि वर्तमान संख्या बल और संभावित समर्थन के आधार पर क्या वह जीत की स्थिति में आ सकती है। यदि पार्टी को अनुकूल स्थिति नजर आती है, तो वह उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस को सीधी चुनौती दे सकती है। ...तो दो और सीटों पर हो सकता है चुनाव वर्तमान स्थिति के अनुसार प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना तय है। वहीं दो अन्य राज्यसभा सीटों पर चुनाव की संभावना बनी हुई है। प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का गणित इस बार प्रदेश से दूर दक्षिण भारत के चुनाव परिणामों से प्रभावित होता नजर आ रहा है। खासकर राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय मंत्री डॉ. एल मुरुगन तमिलनाडु और जॉर्ज कुरियन केरल की कांजीरापल्ली विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में है। इनकी हार जीत प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। कुरियन का कार्यकाल पूरा हो रहा है। मुरुगन यदि चुनाव जीते तो राज्यसभा में उनकी सीट खाली हो जाएगी। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक के लिए है। तमिलनाडु की अविनाशी सीट से प्रत्याशी डॉ. एल मुरुगन है। यहां पर 23 अप्रैल को मतदान हुआ है। वहीं, केरल में 9 अप्रैल को एक चरण में वोट डाले गए। कुरियन और मुरुगन के चुनाव का रिजल्ट 4 मई को आएगा। यदि तमिलनाडु की अविनाशी सीट से चुनाव लड़ रहे डॉ. एल मुरुगन चुनाव जीतते है, तो उन्हें राज्यसभा सदस्यता छोडऩी पड़ेगी। उनका कार्यकाल 2030 तक का है। मध्य प्रदेश से वह दूसरी बार राज्यसभा गए हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश में खाली होने वाली सीटों की संख्या बढ़ सकती है। अभी जहां तीन सीटों पर चुनाव होना है, वहीं इस्तीफे की स्थिति में यह संख्या चार तक पहुंच सकती है। एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी: मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के आधार पर राज्यसभा की एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी हैं। भाजपा के पास 160 से अधिक विधायक हैं, जिससे उसकी दो सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं। असली मुकाबला तीसरी और संभावित चौथी सीट को लेकर है। कांग्रेस के पास कागजों पर करीब 65 विधायक हैं, लेकिन कुछ कारणों से प्रभावी संख्या घटकर लगभग 62 रह गई है। ऐसे में 58 के आंकड़े से मामूली बढ़त कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बना रही है। विनोद / 04 मई 26